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मैथिली ठाकुर का ‘बंगाल वाला डर’ और भाजपा का ‘रिपोर्ट कार्ड’: क्या खुद के घर की गंदगी नहीं दिखती?

बृजभूषण से लेकर मणिपुर कांड तक; ADR के आंकड़ों ने खोली पोल— भाजपा में 54 माननीयों पर महिलाओं के विरुद्ध अपराध के केस!

विशेष ब्यूरो, महानगर मेट्रो : पटना/कोलकाता : बिहार की भाजपा नेता और लोक गायिका मैथिली ठाकुर इन दिनों चर्चा में हैं, लेकिन अपने गीतों के लिए नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में एक महिला के तौर पर ‘असहज’ महसूस करने वाले अपने बयान के लिए। मैथिली जी का यह डर और उनकी यह असहजता आज बुद्धिजीवियों और राजनीतिक विश्लेषकों के गले नहीं उतर रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जो मैथिली ठाकुर बंगाल में असुरक्षित महसूस कर रही हैं, वो अपनी ही पार्टी के भीतर व्याप्त ‘अपराध तंत्र’ को देखकर इतनी सहज कैसे हैं?

पार्टी के भीतर ‘दागियों’ की लंबी फेहरिस्त

मैथिली बहन, जिस पार्टी का झंडा आप बुलंद कर रही हैं, उसमें चेहरों की कमी नहीं है। क्या आपको उस समय असहजता नहीं हुई जब:

बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों ने यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए?
हरदीप पुरी का नाम उन फाइलों में उछला जो महिलाओं के प्रति क्रूरता का दस्तावेज हैं?
आपके दल के नेता ने एक महिला सांसद को संसद के भीतर ‘शूर्पणखा’ कहकर अपमानित किया?
देश की एक प्रतिष्ठित महिला को ’50 करोड़ की गर्लफ्रेंड’ कहकर संबोधित किया गया?
आंकड़े जो रूह कंपा दें (ADR रिपोर्ट 2024)
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के आंकड़े आपकी ‘सहजता’ पर करारा तमाचा हैं।
151 माननीय दागी: पूरे देश में 151 सांसदों और विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध (छेड़खानी, दुष्कर्म, मारपीट) के मामले दर्ज हैं।
भाजपा सबसे आगे: इन 151 नामों में से सबसे ज्यादा 54 नाम अकेले आपकी पार्टी भाजपा के हैं।
बिहार का हाल: 14 अक्टूबर 2025 को जब आप भाजपा में शामिल हुईं, तब बिहार विधानसभा में भाजपा के 64% विधायकों पर आपराधिक केस दर्ज थे।
इसमें हत्या और बलात्कार जैसे संगीन जुर्म शामिल थे।

मणिपुर और बंगाल: दोहरा मापदंड?

मैथिली जी, आपने बंगाल की असुरक्षा पर तो बात की, लेकिन क्या कभी मणिपुर की सुध ली? वहां आपकी ही पार्टी की सरकार है, जहां महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़कों पर घुमाया गया। क्या वहां आपको असहजता महसूस नहीं हुई? क्या आपको उस समय शर्म नहीं आई जब आपकी ही पार्टी के विधायक
विधानसभा में बैठकर पोन (Porn) देखते पकड़े गए?

“मैथिली जी, ‘दीदी ओ दीदी’ कहकर एक महिला मुख्यमंत्री को चिढ़ाना और किसी की मां को बार डांसर कहना क्या आपके संस्कारों और आपकी सहजता का हिस्सा है?”

जब सत्ता पक्ष की एक महिला नेता खुद को असुरक्षित बताती है, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। लेकिन जब वही नेता अपनी पार्टी के भीतर बैठे 54 महिला-अपराधियों पर मौन साधे रहती है, तो यह उसकी ‘चुनिंदा असहजता’ (Selective Discomfort) और राजनीति से प्रेरित पाखंड को दर्शाता है। मैथिली जी, एक बार मणिपुर हो आइये, शायद वहां की चीखें आपकी इस बनावटी असहजता को आईना दिखा सकें।

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