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जनपद पंचायत छुईखदान में वार्षिक बजट प्रक्रिया पर गंभीर विवाद, वित्तीय नियमों के उल्लंघन के आरोप

राजनांदगांव। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के जनपद पंचायत छुईखदान में वित्तीय वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट अनुमान को लेकर प्रशासनिक एवं वित्तीय विवाद गहरा गया है। जनपद पंचायत के सभापति सुधीर गोलछा ने प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पर वित्तीय अनियमितताओं, वैधानिक प्रक्रियाओं की अवहेलना तथा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों के हनन जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

सभापति द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में उल्लेख किया गया है कि बजट निर्माण की प्रक्रिया छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग द्वारा जारी स्थायी वित्त निर्देशों, विशेषकर पत्र क्रमांक 387/वित्त/नियम/चार/2025 दिनांक 21 जुलाई 2025 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं अपनाई जा रही है। आरोप है कि एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी को आहरण एवं संवितरण अधिकारी (Drawing and Disbursing Officer – DDO) का प्रभार सौंपा गया है, जो वित्तीय नियमों एवं प्रशासनिक पदानुक्रम के विरुद्ध है।

पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि किसी भी स्थानीय निकाय के वार्षिक बजट अनुमान के निर्माण हेतु विधिवत प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है, जिसमें विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप आय-व्यय का यथार्थ आकलन, पूर्व वर्ष के व्यय का विश्लेषण, योजनागत एवं गैर-योजनागत मदों का वर्गीकरण तथा संबंधित समितियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाती है। इसके अतिरिक्त, बजट मसौदे को सामान्य प्रशासन समिति के समक्ष प्रस्तुत करने से पूर्व निर्वाचित सदस्यों के बीच निर्धारित समयावधि के भीतर प्रचालित (circulate) किया जाना भी एक आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया है।

सभापति ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025-26 के बजट निर्माण में भी इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था और उन्हें, एक निर्वाचित सदस्य एवं सभापति होने के बावजूद, बजट निर्माण प्रक्रिया से वंचित रखा गया। इसे उन्होंने “प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों” तथा “संवैधानिक विकेन्द्रीकरण की भावना” के विपरीत बताया है।

पत्र में आगे कहा गया है कि सामान्य प्रशासन समिति की पूर्व बैठक में उच्च कार्यालय से मार्गदर्शन प्राप्त करने हेतु प्रस्ताव पारित किया गया था, किंतु यदि इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं, तो उन्हें अब तक साझा नहीं किया गया है। यह पारदर्शिता एवं जवाबदेही के सिद्धांतों के विपरीत माना गया है।

सभापति ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान को निम्नलिखित प्रशासनिक एवं वित्तीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए:

  • वैध एवं सत्यापित वित्तीय आंकड़ों का उपयोग
  • सक्षम प्राधिकारी से मार्गदर्शन प्राप्त करना
  • बजट मसौदे का पूर्व प्रचलन (advance circulation)
  • सामान्य प्रशासन समिति एवं सामान्य सभा के समक्ष विधिवत अनुमोदन

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उक्त प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया तो प्रकरण को विभागीय उच्चाधिकारियों, वित्त विभाग तथा महालेखाकार, रायपुर के समक्ष औपचारिक शिकायत के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सभापति ने कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा उपसंचालक पंचायत को प्रतिलिपि प्रेषित करते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि संबंधित अधिकारी को आहरण एवं संवितरण अधिकारी के प्रभार से अस्थायी रूप से हटाया जाए तथा डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में जांच समिति गठित कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

प्रशासनिक हलकों में इस मामले को वित्तीय अनुशासन, जवाबदेही और स्थानीय स्वशासन की पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है। जनपद पंचायत के अन्य सदस्यों में भी इस विषय को लेकर असंतोष व्याप्त है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस प्रकरण में क्या रुख अपनाता है और क्या बजट निर्माण प्रक्रिया को नियमानुसार पुनः संचालित किया जाता है।

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