ब्यूरो रिपोर्ट | महानगर मेट्रो : चुनाव की रणभेरी बजते ही गली-कूचों में ‘सेवा’ की बाढ़ आ गई है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि चुनाव से ठीक पहले उमड़ने वाला यह प्रेम क्या वाकई जनसेवा है? हकीकत यह है कि चुनाव के समय नाश्ते, पानी, शराब और नोटों के बंडल के नाम पर जो ‘परोसा’ जा रहा है, वह आपकी खुशियों को लूटने का बिछाया गया जाल है। याद रखें, आज का एक मुफ्त का भोजन, आपके भविष्य की पांच साल की रोटी छीन सकता है।
एक दिन का लालच, पांच साल का वनवास
चुनावी मौसम में सक्रिय हुए स्वयंभू समाजसेवियों का गणित बहुत सीधा है— “आज खिलाओ, कल लूटो।” * क्षणभंगुर सुख: वह नाश्ता, वह शराब की बोतल या चंद रुपयों की गड्डी एक दिन में खत्म हो जाएगी।
विकास पर ब्रेक: जब आप अपना मत बेचते हैं, तो आप उम्मीदवार को यह हक दे देते हैं कि वह जीतने के बाद आपके गांव की सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के बजाय अपनी तिजोरी भरने की चिंता करे।
लोकतंत्र की नीलामी: मतदान आपका अधिकार है, कोई बाजार की वस्तु नहीं जिसे खरीदा या बेचा जा सके।
मत बेचोगे तो लुट जाएगी खुशियों की चाबी!
महानगर मेट्रो आज हर मतदाता से यह अपील करता है कि जागृत बनें। जो उम्मीदवार वोट खरीदने के लिए पैसा खर्च कर रहा है, वह निवेश (Investment) कर रहा है, सेवा नहीं। और जो निवेश करता है, वह जीतने के बाद ‘मुनाफा’ वसूलता है।
आपका एक गलत फैसला गांव के विकास को पांच साल पीछे धकेल देगा। जब विकास के नाम पर खस्ताहाल सड़कें और सूखते नल दिखेंगे, तब आपके वो चंद रुपये आपकी मदद नहीं कर पाएंगे।”
जागरूक बनें, नैतिक बनें
लोकतंत्र का महापर्व आ रहा है। यह समय अपनी नैतिकता दिखाने का है, न कि लालच में बहने का।
ईमानदारी से चुनें: उसे चुनें जो आपके बच्चों के भविष्य की बात करे, उसे नहीं जो आपकी एक रात की भूख मिटाने का ढोंग करे।
सोदा नहीं, संकल्प: मतदान को सौदा न बनने दें। यह एक संकल्प है—एक बेहतर भविष्य के लिए, एक सशक्त गांव और शहर के लिए।

