कोलकाता/दिल्ली | विशेष ब्यूरो
पश्चिम बंगाल के चुनावी अखाड़े में ‘दीदी’ बनाम ‘दादा’ की जंग अब केवल रैलियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं के घेरे में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में राष्ट्र के नाम दिए गए संबोधन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा ऐतराज जताया है। ममता बनर्जी ने इसे प्रधानमंत्री पद का दुरुपयोग और आचार संहिता का खुला उल्लंघन करार देते हुए चुनाव आयोग (EC) का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया है।
दीदी के तीखे बाण: “राष्ट्र संबोधन की आड़ में राजनीतिक एजेंडा”
ममता बनर्जी ने प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री के भाषण पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जब देश चुनाव के मुहाने पर खड़ा है, तब प्रधानमंत्री सरकारी मंच का उपयोग अपनी पार्टी के वोट मांगने के लिए कर रहे हैं।
सीधा आरोप: ममता ने कहा, “प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करने के बहाने केवल अपनी उपलब्धियों का गुणगान किया और विपक्ष को निशाना बनाया। यह संबोधन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित चुनावी रैली थी।”
आयोग से गुहार: टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि वे डिजिटल साक्ष्यों के साथ चुनाव आयोग से शिकायत करेंगे कि कैसे सरकारी तंत्र और समय का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया गया।
सत्ता की पिच पर ‘फ्री हिट’ की कोशिश?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी इस मुद्दे के जरिए प्रधानमंत्री को रक्षात्मक मुद्रा (Defensive mode) में लाना चाहती हैं।
1 संवैधानिक मर्यादा का सवाल: क्या चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संदेश देना ‘ऑफिशियल ड्यूटी’ है या ‘पॉलिटिकल कैंपेनिंग’?
2 विपक्ष की गोलबंदी: ममता के इस कदम को अन्य विपक्षी दलों का भी समर्थन मिल सकता है, जिससे चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ना तय है।
महानगर मेट्रो का विश्लेषण: जब सियासत ही संबोधन बन जाए!
बंगाल की धरती पर एक-एक सीट के लिए मचे घमासान के बीच यह विवाद आग में घी का काम करेगा। एक तरफ भाजपा इसे राष्ट्रहित में दिया गया संदेश बता रही है, तो दूसरी तरफ टीएमसी इसे ‘अनैतिक’ करार दे रही है।

