अहमदाबाद | विशेष संवाददाता :
किस्मत का खेल भी कितना अजीब है, एक तरफ एक हंसते-खेलते परिवार का लाडला सड़क हादसे का शिकार होकर दुनिया छोड़ गया, तो दूसरी तरफ उसी की ‘शहादत’ ने छह अजनबियों को मौत के मुंह से खींच लिया। अहमदाबाद के 17 वर्षीय छात्र क्रिश अकबरी की असमय मौत ने पूरे गुजरात को झकझोर दिया है, लेकिन उसके परिवार ने जो हौसला दिखाया, उसने मानवता का एक नया इतिहास लिख दिया है।
जब शोक बना ‘वरदान’: एक साहसी फैसला
हादसे के बाद जब डॉक्टरों ने क्रिश को ‘ब्रेन डेड’ घोषित किया, तो अकबरी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन उस चीख-पुकार के बीच क्रिश के पिता और स्वजनों ने एक ऐसा निर्णय लिया जो किसी महान तपस्या से कम नहीं था। उन्होंने तय किया कि उनका बेटा राख बनकर हवा में नहीं मिलेगा, बल्कि किसी और के शरीर में धड़ककर ज़िंदा रहेगा।
प्राइवेट सेक्टर में पहली बार ‘हाथों का दान’: एक चिकित्सा क्रांति
यह मामला केवल भावनाओं का नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस के लिए भी एक मील का पत्थर है। गुजरात के निजी चिकित्सा क्षेत्र के इतिहास में पहली बार हाथों का दान (Hand Transplant) किया गया है।
नया जीवन: क्रिश के अंगों से न केवल किसी को सांसें मिलीं, बल्कि किसी को दुनिया देखने का नज़रिया और किसी को काम करने के लिए हाथ मिले।
अंगों की फेहरिस्त: क्रिश के हृदय, फेफड़े, दोनों किडनी और दोनों हाथों का दान कर मानवता की महक फैलाई गई।
6 परिवारों के लिए ‘फरिश्ता’ बना क्रिश
अकबरी परिवार ने अपना चिराग खो दिया, लेकिन उनकी उदारता ने छह उन परिवारों को खुशियां लौटाईं जो बरसों से किसी चमत्कार की उम्मीद में थे।
“आज क्रिश की धड़कन किसी और के सीने में गूँज रही है और उसके हाथ किसी और के जीवन का सहारा बन रहे हैं। वह मरा नहीं है, वह उन छह जिंदगियों में बंटकर अमर हो गया है।”

