गुजरात की मशहूर लोकगायिका काजल मेहरिया के प्रेम विवाह पर मचा बवाल: भाई ने समाज से मांगी मदद, पुलिस स्टेशन पहुँचा मामला
अहमदाबाद/मेहसाणा | विशेष संवाददाता : गुजरात की संगीत दुनिया की एक और मशहूर आवाज़, लोकगायिका काजल मेहरिया, इस समय अपनी निजी जिंदगी को लेकर विवादों के घेरे में हैं। सुरों से लाखों दिलों को जीतने वाली काजल मेहरिया ने परिवार की मर्जी के खिलाफ प्रेम विवाह (Love Marriage) कर लिया है, जिसके बाद अब यह पारिवारिक मामला पुलिस की चौखट और समाज के चौराहों तक पहुँच गया है।
सोशल मीडिया पोस्ट से फूटा विवाद का भांडा
विवाद की शुरुआत तब हुई जब काजल मेहरिया के भाई ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि काजल ने परिवार को बताए बिना चुपके से शादी कर ली है। भाई ने मेहरिया समाज के अगुआओं और बड़े-बुजुर्गों से इस मामले में हस्तक्षेप करने और परिवार की मदद करने की गुहार लगाई।
ससुराल में हंगामा और पुलिस की एंट्री
रविवार को मामला तब और गरमा गया जब काजल मेहरिया के परिवार के सदस्य और समाज के कुछ नेता उनके ससुराल जा धमके।
गरमा-गरमी: मौके पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
थाने पहुँचा विवाद: सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई को देखते हुए मामला स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुँचा। पुलिस अब दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश में जुटी है।
लोकगायिकाओं के ‘लव मैरिज’ का सिलसिला और समाज की चिंता
गुजरात में पिछले कुछ समय से लोकगायिकाओं द्वारा परिवार की इच्छा के विरुद्ध विवाह करने के कई मामले सामने आए हैं।
समाज का रुख: मेहरिया समाज के कुछ नेताओं का कहना है कि यह केवल एक शादी का मामला नहीं है, बल्कि इससे सामाजिक परंपराओं और पारिवारिक प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता: वहीं, सोशल मीडिया पर एक वर्ग ऐसा भी है जो इसे काजल की व्यक्तिगत पसंद और कानूनी अधिकार मानकर उनका समर्थन कर रहा है।
महानगर मेट्रो का विश्लेषण: कला और व्यक्तिगत जीवन की खींचतान
जब कोई कलाकार सार्वजनिक जीवन में होता है, तो उसकी निजी जिंदगी भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाती है। काजल मेहरिया गुजरात की एक स्थापित कलाकार हैं, ऐसे में उनके भाई की एक पोस्ट ने पूरे समाज को इस विवाद में खींच लिया है।
“क्या एक कलाकार की निजी पसंद समाज और परिवार के मानकों से ऊपर है? या फिर लोकगायिका होने के नाते उन पर सामाजिक परंपराओं का पालन करने का नैतिक दबाव अधिक है? यह सवाल अब गुजरात के हर घर में चर्चा का विषय बना हुआ है।”

