पुरोहित परेश भाई जैसे निष्ठावानों की अनदेखी पर जनता को आ रही दया; सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
महानगर मेट्रो ब्यूरो, उत्तर गुजरात : उत्तर गुजरात की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, उम्मीदवारों के चयन को लेकर असंतोष की ज्वाला भड़क उठी है। ताजा मामला ‘टिकट बंटवारे’ को लेकर है, जहाँ आरोप लग रहे हैं कि योग्यता और निष्ठा को ताक पर रखकर ‘पैसे के जोर’ पर टिकट बांटी गई है।
निष्ठावानों की अनदेखी: क्या अब केवल धनबल ही पैमाना है?
क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म है कि पार्टी के लिए सालों तक पसीना बहाने वाले पुरोहित परेश भाई जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया है। जनता और समर्थकों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने जमीनी स्तर पर काम किया, आज उसे ऐसे लोगों के लिए ‘गाभा मारना’ (जी-हजूरी या साफ-सफाई) पड़ रहा है, जिनका राजनीति में आधार सिर्फ उनकी मोटी जेब है।
सोशल मीडिया पर उमड़ा दर्द: “दया आती है ऐसी स्थिति पर”
सोशल मीडिया पर समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। एक वायरल पोस्ट में लिखा गया है:
“बेहद दुखद है कि राजनीति अब व्यापार बन गई है। पुरोहित परेश भाई जैसे ईमानदार व्यक्तित्व को आज इन ‘धनपशुओं’ के आगे झुकना पड़ रहा है। यह देखकर उन पर दया आती है और व्यवस्था पर गुस्सा।”
पार्टी के भीतर बगावत के सुर?
पैसे के दम पर टिकट हासिल करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ जमीनी कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। सूत्रों की मानें तो अगर आलाकमान ने जल्द ही स्थिति नहीं संभाली, तो चुनावी मैदान में ‘नोटों की गड्डी’ पर ‘जनता का डंडा’ भारी पड़ सकता है। पुरोहित परेश भाई के समर्थकों का साफ कहना है कि वे किसी भी कीमत पर स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगे।
महानगर मेट्रो का सवाल: क्या लोकतंत्र में अब वोट की ताकत, नोट की ताकत के सामने घुटने टेक देगी? आखिर कब तक समर्पित कार्यकर्ताओं की बलि चढ़ाई जाएगी?

