महंगाई की आग में झुलस रही जनता, सत्ता के नशे में प्रचार और तामझाम में मस्त है सरकार; महानगर मेट्रो की विशेष पड़ताल
अहमदाबाद : गुजरात की जनता इस समय एक अजीबोगरीब और कष्टकारी दौर से गुजर रही है। एक तरफ महंगाई का दानव मध्यम वर्गीय परिवारों के रसोईघर तक जा पहुँचा है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल ‘डबल इंजन’ के नाम पर जनता पर ‘डबल मार’ मारता दिखाई दे रहा है। जैसे-जैसे चुनावी बिगुल बज रहा है, जनता के बुनियादी मुद्दे हाशिए पर धकेले जा रहे हैं और चारों तरफ केवल भव्य प्रचार और बेहिसाब खर्च का तमाशा दिखाई दे रहा है।
रसोई का बजट बिगड़ा, आखिर कहाँ है विकास?
गैस सिलेंडर हो, खाद्य तेल हो या सब्जियां—दाम आसमान छू रहे हैं। आम आदमी के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी दूभर हो गया है। सरकार ‘विकास’ के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या विकास का मतलब सिर्फ भव्य रोड-शो और करोड़ों के होर्डिंग्स हैं? जिस डबल इंजन के भरोसे वोट मांगे गए थे, वह इंजन महंगाई रोकने के नाम पर आखिर क्यों हांफ रहा है?
जनता त्रस्त, सरकार प्रचार में मस्त
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब जनता महंगाई की चक्की में पिस रही है, तब सत्ताधारी दल अपनी कुर्सी बचाने के लिए सरकारी तंत्र और धन का निर्लज्जता से उपयोग कर रहा है। जगह-जगह आयोजित भव्य कार्यक्रम, आलीशान मंच और विज्ञापनों पर पानी की तरह बहाया जा रहा पैसा यह बताने के लिए काफी है कि सरकार को जनता के आंसुओं से ज्यादा अपनी वोटबैंक की फिक्र है।
महानगर मेट्रो के चुभते सवाल:
क्या प्रचार पर खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये महंगाई कम करने में इस्तेमाल नहीं हो सकते?
आम आदमी की जेब खाली करके आखिर किस ‘विकास’ का उत्सव मनाया जा रहा है?
सत्ता हथियाने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई का ऐसा दुरुपयोग कितना जायज है?
गुजरात की समझदार जनता सब देख रही है। वह समय दूर नहीं जब यही जनता महंगाई के आंकड़ों और झूठे प्रचार का हिसाब मांगेगी। सरकार के लिए इस बार की राह आसान नहीं होगी, क्योंकि पेट की आग किसी भी लुभावने विज्ञापन से नहीं बुझती!
ब्यूरो रिपोर्ट: महानगर मेट्रो, अहमदाबाद

