घर में ही लगी आग: अनुशासन वाली पार्टी के दावों की पोल खुली; कार्यकर्ता के बागी सुरों ने सत्ता के गलियारों में मचाया हड़कंप
अहमदाबाद : गुजरात भाजपा के लिए समय कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक तरफ सरकार और संगठन ‘विकास’ के बड़े-बड़े ढोल पीटने से थक नहीं रहे, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के ही एक निष्ठावान कार्यकर्ता ने सार्वजनिक रूप से नेताओं की कार्यशैली का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहे एक वीडियो ने विपक्ष को तो मौका दिया ही है, लेकिन साथ ही ‘कमल’ के हाईकमान के माथे पर भी पसीना ला दिया है।
वीडियो में क्या है? ‘विकास’ की नग्न हकीकत
वायरल वीडियो में कार्यकर्ता साफ तौर पर अपना दर्द बयां करते हुए कह रहा है, “बड़े नेता एसी गाड़ियों में घूम रहे हैं और अपनी दुनिया में मस्त हैं, जबकि आम जनता महंगाई और भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रही है।” कार्यकर्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि चुनाव के समय तो जमीनी कार्यकर्ताओं के पैर छुए जाते हैं, लेकिन सत्ता मिलते ही नेता उन्हें पहचानना तक भूल जाते हैं। सड़क के गड्ढे, शिक्षा का गिरता स्तर और बेकाबू महंगाई को लेकर इस कार्यकर्ता ने भाजपा के सो-कॉल्ड ‘विकास’ की बखिया उधेड़ कर रख दी है।
अनुशासन के उड़े परखच्चे: व्यक्तिगत गुबार या जनता की आवाज?
भाजपा हमेशा अपने ‘अनुशासन’ और ‘कैडर’ की बात करती है, लेकिन जब घर का ही सदस्य चौराहे पर खड़ा होकर बगावत करे, तो समझ लेना चाहिए कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है। यह वीडियो सिर्फ एक कार्यकर्ता का गुस्सा नहीं, बल्कि हर गली-मोहल्ले में गूँज रही जनता की दबी हुई आवाज है। लोग अब पूछ रहे हैं—क्या यही वे ‘अच्छे दिन’ हैं जिनका सपना दिखाया गया था?
महानगर मेट्रो के चुभते सवाल:
क्या अब पार्टी के भीतर लोकतंत्र और संवाद खत्म हो चुका है?
नेता जनता की समस्याओं को सुनने के बजाय सिर्फ प्रचार और इवेंट मैनेजमेंट में क्यों व्यस्त हैं?
जो सरकार अपने ही समर्पित कार्यकर्ताओं को खुश नहीं रख सकती, वह आम जनता का भला कैसे करेगी?
इस वायरल वीडियो ने भाजपा के ‘ऑल इज वेल’ (सब ठीक है) वाले गुब्बारे की हवा निकाल दी है। अगर समय रहते नेताओं ने अपनी जमीनी हकीकत नहीं सुधारी, तो यह असंतोष आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक ज्वालामुखी का रूप ले सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट: महानगर मेट्रो, अहमदाबाद

