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चुनावी सुधार : ‘स्याही के साथ अब स्कैनिंग भी जरूरी’ : सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय का बड़ा सुझाव

नई दिल्ली/ब्यूरो: भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने एक क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा है। उनका मानना है कि अब चुनाव प्रणाली में केवल उंगली पर स्याही लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीक का गहरा समावेश अनिवार्य हो गया है।

फर्जी वोटिंग पर लगेगा पूर्ण विराम

अश्विनी उपाध्याय के अनुसार, मतदान केंद्रों (Polling Booths) पर अब मतदाताओं की केवल पहचान देखना काफी नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया है कि मतदान के समय:

  1. आधार कार्ड का सत्यापन अनिवार्य हो।
  2. आंखों का स्कैनिंग (Iris Scan) किया जाए।
  3. फिंगरप्रिंट स्कैनिंग की व्यवस्था हो।

विवादों और झगड़ों का होगा अंत

एडवोकेट उपाध्याय का तर्क है कि इस प्रक्रिया से ‘प्रॉक्सि वोटिंग’ (दूसरे के नाम पर वोट डालना) और फर्जी मतदान की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा, “इससे न केवल फर्जी वोट रुकेंगे, बल्कि चुनाव के बाद हार-जीत को लेकर लगने वाले गलत आरोपों पर भी विराम लगेगा। जब डेटा पूरी तरह बायोमेट्रिक होगा, तो चुनावी रंजिश और झगड़े अपने आप समाप्त हो जाएंगे।”

पारदर्शिता की नई दिशा

महानगर मेट्रो से बात करते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सुझाव पर अमल किया जाता है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे बड़ा डिजिटल सुधार साबित हो सकता है। इससे चुनाव आयोग की साख और भी मजबूत होगी और ‘एक नागरिक, एक वोट’ का सिद्धांत पूरी शुद्धता के साथ लागू होगा।

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