विकास के दावों के बीच डरावनी हकीकत: 245 में से महज 54 काम हुए पूरे, बजट की सिर्फ 10% रकम ही हुई खर्च!
अहमदाबाद जिले में रोड-रास्तों के नेटवर्क को मजबूत बनाने के प्रशासन के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों पर ही दौड़ते नजर आ रहे हैं। ‘महानगर मेट्रो’ के पास मौजूद चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, जिले में सड़कों के लिए करोड़ों का बजट आवंटित होने के बावजूद ग्राउंड लेवल पर स्थिति अत्यंत दयनीय है। जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे सड़कों पर लगने के बजाय फाइलों में ही दबे पड़े हैं।
आंकड़ों की मायाजाल: कागजों पर विकास, सड़कों पर विनाश!
अहमदाबाद जिला पंचायत और सड़क-मकान विभाग द्वारा सड़कों के नवीनीकरण और मरम्मत के लिए जो आंकड़े जारी किए गए हैं, वे प्रशासन की पोल खोल रहे हैं:
- कुल मंजूर काम: 245
- कुल मंजूर बजट: ₹542 करोड़
- पूरे हुए काम: केवल 54 (जो कुल काम का महज 22% है)
- खर्च की गई राशि: केवल ₹49 करोड़ (कुल बजट के 10% से भी कम!)
प्रशासन की सुस्ती या ठेकेदारों की मनमानी?
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून से पहले सड़कों का काम पूरा हो जाना चाहिए, लेकिन अब तक मुट्ठी भर काम ही पूरे हुए हैं। बाकी 191 काम या तो बीच में लटके हैं या फिर अभी शुरू ही नहीं हुए। ₹542 करोड़ का भारी-भरकम बजट होने के बावजूद केवल 49 करोड़ रुपये खर्च होना यह दर्शाता है कि प्रशासन के पास काम पूरा करने की न तो कोई ठोस योजना है और न ही इच्छाशक्ति।
जनता परेशान, नेता खामोश!
अहमदाबाद जिले के कई गांवों को जोड़ने वाली सड़कें आज भी बदहाल स्थिति में हैं। वाहन चालक जर्जर सड़कों पर चलने को मजबूर हैं। जब इतनी बड़ी राशि आवंटित की जा चुकी है, तो काम में देरी होना सीधे तौर पर संदेह पैदा करता है। क्या ठेकेदारों को संरक्षण दिया जा रहा है? या फिर अधिकारियों की मिलीभगत से यह देरी हो रही है?
‘महानगर मेट्रो’ का सवाल:
विकास का ढिंढोरा पीटने वाले सत्ताधीश जवाब दें कि जब करोड़ों का बजट पड़ा है, तो अहमदाबाद की जनता बदहाल सड़कों पर कब तक ठोकरें खाएगी? 245 में से केवल 54 काम पूरे करके आप कौन से विकास की गाथा गा रहे हैं?
संपादक: पवन माकन
ब्यूरो रिपोर्ट: महानगर मेट्रो

