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एक्सक्लूसिव रिपोर्ट : शाहीबाग पुलिस स्टेशन में ‘वहीवटदारों’ का बोलबाला! हर्षद भाई और प्रदीप सिंह के नेटवर्क पर लटकी जांच की तलवार?

पवन माकन, महानगर मेट्रो
अहमदाबाद:

गुजरात पुलिस मुख्यालय और कमिश्नर ऑफिस की नाक के नीचे स्थित शाहीबाग पुलिस स्टेशन इन दिनों कानून-व्यवस्था से ज्यादा अपने अंदरूनी ‘वहीवट’ (लेन-देन) को लेकर चर्चाओं में है। पुलिस महकमे के गलियारों में दबी जुबान से दो नाम सबसे ज्यादा उछल रहे हैं – हर्षद भाई और प्रदीप सिंह। ‘महानगर मेट्रो’ की विशेष पड़ताल में सामने आया है कि ये दोनों नाम शाहीबाग इलाके के अघोषित ‘मैनेजर’ बन चुके हैं।
हर्षद भाई और प्रदीप सिंह: खाकी के पीछे के ‘असली खिलाड़ी’?

शाहीबाग पुलिस स्टेशन क्षेत्र में आने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठान हों, अवैध निर्माण हों या अन्य गतिविधियां, हर जगह इन दोनों नामों की धमक सुनाई देती है। सूत्रों के अनुसार:

  • हर्षद भाई: साहब के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले हर्षद भाई का मुख्य काम ‘कलेक्शन’ और ‘नेटवर्किंग’ को संभालना बताया जाता है।
  • प्रदीप सिंह: वहीवट की पूरी चेन को सुरक्षित रखना और उसे ऊपर तक व्यवस्थित तरीके से पहुँचाना, इसमें प्रदीप सिंह की भूमिका अहम मानी जा रही है।
    कितना जोखिम उठाते हैं ये ‘वहीवटदार’?

शाहीबाग जैसे संवेदनशील और VVIP इलाके में वहीवट करना आग से खेलने जैसा है:

  • ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) का साया: कमिश्नर ऑफिस के करीब होने के कारण शाहीबाग हमेशा ACB की रडार पर रहता है। हर्षद भाई और प्रदीप सिंह जैसे वहीवटदारों के लिए एक छोटी सी चूक भी सलाखों के पीछे पहुँचा सकती है।
  • ‘बलि का बकरा’ बनने का डर: जब भी कोई बड़ा मामला मीडिया में उछलता है या उच्च स्तर पर शिकायत पहुँचती है, तो बड़े अधिकारी खुद को बचाने के लिए सबसे पहले इन्हीं वहीवटदारों को ‘बलि का बकरा’ बनाते हैं। इनका सस्पेंशन या ट्रांसफर तय होता है, जबकि पीछे बैठे ‘आका’ सुरक्षित रहते हैं।
  • विभागीय ईर्ष्या और जासूसी: पुलिस स्टेशन के अंदर ही दूसरे कर्मचारी इन दोनों के ‘पावर’ और ‘अवैध कमाई’ से जलते हैं। अक्सर अपने ही साथी इनकी मुखबरी कर इन्हें फंसाने की ताक में रहते हैं।

‘महानगर मेट्रो’ के तीखे सवाल:

  • क्या शाहीबाग पुलिस स्टेशन के उच्च अधिकारियों को हर्षद भाई और प्रदीप सिंह के इस ‘वहीवट’ की जानकारी नहीं है?
  • अगर ये दोनों पकड़े जाते हैं, तो क्या इनके पीछे छिपे असली ‘मास्टरमाइंड’ पर भी कार्रवाई होगी?
  • आम जनता की शिकायतें महीनों लटकी रहती हैं, लेकिन वहीवटदारों के काम मिनटों में कैसे हो जाते हैं?

शाहीबाग पुलिस स्टेशन का यह ‘वहीवट’ तंत्र अब ज्यादा समय तक पर्दे के पीछे नहीं रह पाएगा। ‘महानगर मेट्रो’ इस पूरे नेटवर्क की हर गतिविधि पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।

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