[अहमदाबाद | विशेष प्रतिनिधि, महानगर मेट्रो]
अहमदाबाद शहर के दक्षिण ज़ोन में स्थित नारोल और वटवा पुलिस स्टेशन क्षेत्रों में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है—यहाँ कानून का राज है या असामाजिक तत्वों का? सूत्रों के हवाले से जो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, वे बताते हैं कि इन दोनों क्षेत्रों में नए पुलिस इंस्पेक्टर (PI) के आते ही अपराधियों के ‘अच्छे दिन’ आ गए हैं।
वीरेंद्र: मीडिया का मुखौटा और भ्रष्टाचार का ‘वहीवटदार’
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया का नाम यहाँ कुछ रसूखदारों ने कलंकित कर रखा है। चर्चा है कि नारोल-वटवा में वीरेंद्र नाम का एक शख्स पूरे पुलिस तंत्र को अपनी उंगलियों पर नचा रहा है।
- टेंडर प्रथा का आरोप: पुलिस महकमे की गलियारों में चर्चा है कि इन क्षेत्रों में PI की नियुक्ति भी इसी ‘वहीवटदार’ के इशारे पर ‘टेंडर’ भरकर (बोली लगाकर) की गई है।
- 15 लाख का हफ्ता: विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक पुलिस स्टेशन से हर महीने लगभग 15-15 लाख रुपये की मोटी रकम की वसूली की जा रही है। क्या इसी काली कमाई के दम पर PI गढ़वी और उनकी टीम ‘मूकबधिर’ बनकर तमाशा देख रही है? अपराध के ‘हॉटस्पॉट’: पुलिस की नाक के नीचे मौत का व्यापार
पुलिस थानों से चंद कदमों की दूरी पर चल रहे ये अवैध अड्डे पुलिसिया तंत्र की विफलता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं:
अड्डे का नाम | सटीक लोकेशन | अवैध कारोबार |
| जुबैर | कर्णावती पुलिस चौकी के ठीक पीछे | विदेशी शराब |
| आयशा | आज़ाद पार्क क्षेत्र | विदेशी शराब |
| धमो | तलावड़ी के पास, नारोल | विदेशी शराब |
| सुशीला और टकु | नारोल गाँव, तलावड़ी के पास | देसी शराब की भट्टियां |
| पूजा | बिनसम होटल के पास | देसी शराब |
| नीता | भारत नगर (नारोल थाने के पीछे!) | देसी शराब / अड्डा |
MD ड्रग्स: बर्बादी की कगार पर युवा पीढ़ी
चिंताजनक बात यह है कि अब इन इलाकों में केवल शराब ही नहीं, बल्कि जानलेवा MD ड्रग्स का जहर भी खुलेआम घोला जा रहा है। वहीवटदार वीरेंद्र के कथित संरक्षण में ड्रग पेडलर बेखौफ घूम रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पुलिस कमिश्नर या क्राइम ब्रांच को यह दिखाई नहीं दे रहा? या फिर ‘ऊपर’ तक हफ्ता पहुँचने के कारण सभी ने अपनी आँखें मूंद ली हैं?
लठ्ठाकांड (ज़हरीली शराब) का खतरा: कौन लेगा जिम्मेदारी?
गुजरात का इतिहास गवाह है कि जब-जब पुलिस और बूटलेगरों के बीच ‘वहीवट’ पक्का होता है, तब-तब किसी गरीब का घर उजड़ता है।
बड़ा सवाल: अगर नारोल में कोई लठ्ठाकांड होता है, तो क्या PCB, DCP या ACP क्राइम ब्रांच अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे? या फिर हर बार की तरह छोटे कर्मचारियों को सस्पेंड कर खानापूर्ति कर दी जाएगी?
निष्कर्ष: एक जांबाज अधिकारी की तलाश
क्या अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर इस ‘वहीवटदारों की चौकड़ी’ को तोड़ पाएंगे? क्या गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी इस भ्रष्ट साम्राज्य पर ‘बुलडोजर’ चलवाएंगे? वीरेंद्र और PI गढ़वी की इस जुगलबंदी के खिलाफ क्या कोई ईमानदार पुलिस अधिकारी आवाज उठाएगा, या फिर भ्रष्टाचार की इस गंगा में पूरा तंत्र ही बह जाएगा?
‘महानगर मेट्रो’ इस मामले की पल-पल की अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।

