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दिल्ली की बिजली कंपनियों पर 38000 करोड़ का वित्तीय बोझ, CM रेखा गुप्ता बोलीं- जनता पर नहीं डालेंगे भार, केजरीवाल पर भड़कीं

दिल्ली में बिजली के बढ़ते वित्तीय अंतर का मुद्दा एक बार फिर विधानसभा में गरमा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि करीब 38 हजार करोड़ रुपये के अंतर का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को नहीं भुगतने दिया जाएगा।

नई दिल्ली: दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ते आर्थिक बोझ के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की बिजली कंपनियों ने करीब 38,000 करोड़ रुपये का वित्तीय अंतर पैदा किया है, लेकिन उनकी सरकार इसका भार आम उपभोक्ताओं पर नहीं डालने देगी। गुप्ता ने कहा कि सरकार इस मामले में मजबूती से खड़ी है और अदालत में इसे चुनौती दे रही है।

विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 2014 के बाद बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि बिजली खरीद और वितरण से होने वाले वास्तविक राजस्व के बीच अंतर बढ़ता गया। उनके मुताबिक, यह अंतर धीरे-धीरे एक ‘रेगुलेटरी एसेट’ के रूप में जमा होता गया। गुप्ता ने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं पर इसका बोझ डालने के बजाय इस मामले को कानूनी तौर पर लड़ रही है।

सीएम रेखा गुप्ता ने दिया CAG रिपोर्ट का हवाला

पिछली दिल्ली सरकार के वित्त और प्रदर्शन से जुड़ी दो CAG रिपोर्टों पर विधानसभा में चर्चा का जवाब देते हुए गुप्ता ने पूर्व AAP सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ‘घोटालों’ में डूबी हुई थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल फाइलों पर हस्ताक्षर करने से बचते थे। गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछली सरकार की 19 CAG रिपोर्ट विधानसभा में पेश कराईं, जिनसे कथित अनियमितताओं का पता चलता है।

‘घोषणाएं हुईं, पैसा था लेकिन योजनाएं लागू नहीं हुईं’

मुख्यमंत्री ने CAG के कई निष्कर्षों का जिक्र किया। इनमें कथित तौर पर केंद्र से मिलने वाले सहायता अनुदान में चूक, योजनाओं की घोषणा के बावजूद उनका क्रियान्वयन न होना, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं और GST रिफंड का भुगतान न करना शामिल है।

गुप्ता ने दावा किया कि पिछली सरकार के पास पैसा उपलब्ध था, लेकिन या तो उसे खर्च नहीं किया गया या ‘अनियमित तरीके से’ खर्च किया गया। गुप्ता ने
आरोप लगाया कि AAP सरकार ने 32 योजनाओं की घोषणा की और उनका श्रेय लिया, लेकिन उन पर कोई पैसा खर्च नहीं किया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की 34 योजनाओं को वित्तीय मंजूरी दी गई थी, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने स्कूलों और सड़कों जैसे बुनियादी ढांचे पर काम करने के बजाय घोषणाओं और प्रचार पर जोर दिया।

‘दिल्ली को तबाह कर दिया’

मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने दिल्ली को ‘तबाह’ कर दिया और लोगों को ‘लूटा’। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाओं के नाम पर घोषणाएं की गईं, प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन अंतिम नतीजा शून्य रहा। गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार अब शासन, विकास और योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावित करने वाली खामियों को दूर करने पर काम कर रही है। AAP की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

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