देश की संसद, यानी लोकसभा में NEET पेपर लीक और एजुकेशन सेक्टर में गड़बड़ियों का मुद्दा काफी गरमा गया है। विपक्ष के नेता और कांग्रेस MP गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार और एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान पर तीखे आरोप लगाकर सदन में भारी हंगामा किया है। गौरव गोगोई ने बेहद तीखे और तीखे हमले करते हुए कहा, “देश में 21 मासूम और टैलेंटेड स्टूडेंट्स ने सुसाइड कर लिया और सरकार शर्म महसूस करने के बजाय एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान को सम्मानित कर रही है!”
लोकसभा में गोगोई के तीखे हमले: माता-पिता और युवाओं का दर्द बयां किया
संसद के सेशन के दौरान बहस में हिस्सा लेते हुए गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार की पॉलिसी और असंवेदनशीलता पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश भर में लाखों स्टूडेंट्स दिन-रात कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी करते हैं। माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पेट बांधते हैं और कर्ज में डूब जाते हैं। लेकिन जब पेपर लीक होते हैं या एग्जाम कैंसिल होते हैं, तो पूरा सिस्टम ही खत्म हो जाता है।
गोगोई ने कड़े शब्दों में कहा कि पेपर लीक के भ्रष्टाचार और बुरे भविष्य की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में 21 होनहार स्टूडेंट्स मेंटल स्ट्रेस के कारण सुसाइड जैसा आखिरी कदम उठा चुके हैं। इतनी बड़ी दुखद घटनाओं और लाखों स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ खेले जा रहे खेल के बावजूद, केंद्र सरकार एजुकेशन मिनिस्टर से इस्तीफा मांगने या उनकी जिम्मेदारी तय करने के बजाय अपनी पीठ थपथपा रही है और उन्हें सम्मानित कर रही है।
संसद में विपक्ष का हंगामा और सरकार के खिलाफ तीखे सवाल
गौरव गोगोई के इस हमले के बाद लोकसभा में भारी हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों ने गोगोई के सपोर्ट में नारे लगाए और एजुकेशन मिनिस्टर के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष ने सरकार से कुछ कड़े सवाल पूछे थे:
असंवेदनशीलता कब खत्म होगी?: क्या 21 स्टूडेंट्स की मौतें सरकार के लिए सिर्फ आंकड़े हैं? उनके परिवारों की तकलीफों के लिए कौन जिम्मेदार है? ज़िम्मेदारी किसकी?: अगर NTA जैसी एजेंसियां, जो शिक्षा मंत्रालय के तहत आती हैं, बार-बार फेल होती हैं, तो मंत्री अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी मानकर इस्तीफ़ा क्यों नहीं देते?
घोटालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई कब होगी?: प्रधानमंत्री और सरकार बार-बार पेपर लीक करने वाले लैंड माफ़िया और घोटालेबाज़ों के गैंग के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने के बजाय चुप क्यों हैं?
देश के युवाओं के साथ हो रहा खेल बंद होना चाहिए
गौरव गोगोई के इस हमले ने न सिर्फ़ संसद में बल्कि पूरे देश के युवाओं और माता-पिता के बीच बहस छेड़ दी है। आज के समय में शिक्षा के क्षेत्र में ट्रांसपेरेंसी और सख़्त क़ानून समय की ज़रूरत हैं। जब देश का भविष्य युवा निराशा में आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं, तो राजनीतिक आकाओं को पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर उठकर आत्मचिंतन करना चाहिए।
अगर सरकार पेपर लीक के असली दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई नहीं करती है और छात्रों का शिक्षा सिस्टम से भरोसा उठ जाता है, तो यह देश की तरक्की के लिए सबसे बड़ा घातक झटका साबित होगा।

