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राजकोट में किसान आंदोलन का ज्वालामुखी फूटा: प्रवीण राम मैदान में उतरे, सत्ताधारी पार्टी से सीधे भिड़े!

“जब तक किसान एकजुट रहेंगे, कोई भी ताकत उन्हें हरा नहीं सकती”: राजकोट की धरती से गरजे ‘आप’ नेता, सरकार के कान खड़े कर रहे तीखे सवाल!

गुजरात का दुनिया का सितारा (किसान) आज एक बार फिर अपने हक और इंसाफ की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आया है। राजकोट में चल रहे उग्र किसान आंदोलन में आज माहौल तब और भी गरम हो गया जब आम आदमी पार्टी के फायरब्रांड नेता प्रवीण राम आंदोलन कैंप में पहुंचे। किसानों के समर्थन में मैदान में उतरे प्रवीण राम ने सरकार की सख्त नीतियों और कथित अन्याय के खिलाफ मंच से गरजकर सत्ताधारी पार्टी की नींव हिला दी है।

“बुवाई तो बीत गई, पर क्रांति कहां है?” – सरकारी पॉलिसी पर हमला

आंदोलनकारी किसानों को संबोधित करते हुए प्रवीण राम ने सीधा हमला बोला और कहा कि सरकार हवा में तो बड़ी-बड़ी घोषणाएं और स्कीमों की बातें करती है, लेकिन जब किसान को ज़मीन पर फसल बीमा, मुआवज़ा या खेती के औज़ारों की ज़रूरत होती है, तो सिस्टम कुंभकर्णी नींद में सो जाता है। यह कहते हुए कि, “बुवाई खत्म होने के बाद स्कीम लाने का कोई मतलब नहीं है,” उन्होंने कपास क्रांति और खेती की पॉलिसी के नाम पर हो रहे कथित ड्रामों को बेनकाब किया।

किसानों को दी ‘पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी’: आंदोलन तोड़ने की साज़िशें नाकाम!

प्रवीण राम ने किसानों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए एक बड़ी पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी दी है। उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाया कि, “जब भी किसान अपने हक के लिए आवाज़ उठाते हैं, तो अधिकारी हिंसा, जुर्माना और भेदभाव का सहारा लेकर आंदोलन को तोड़ने और किसानों को आपस में लड़ाने की कोशिश करते हैं। लेकिन राजकोट और पूरे गुजरात के किसान अब जागरूक हो चुके हैं। अगर किसान नहीं टूटे, तो किसी भी घमंडी सरकार को भी झुकना पड़ेगा और यह लड़ाई ज़रूर जीती जाएगी।”

‘महानगर मेट्रो ‘ का बड़ा सवाल: अन्नदाता को कब तक सड़कों पर भटकाओगे?

राजकोट में किसानों के इस ज़बरदस्त विरोध के बाद पॉलिटिक्स में काफ़ी गरमाहट आ गई है। विपक्षी नेता भी अब इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए कमर कस रहे हैं।

‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ सत्ता की गद्दी पर बैठे आकाओं से बिना किसी झिझक के पूछता है – जिन किसानों के पसीने से देश पलता है, उन्हें अपने ही हक़ के लिए लगातार आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है? क्या सरकार इस बढ़ते जन आक्रोश को सुनेगी या बल प्रयोग करके आवाज़ दबाने की कोशिश करती रहेगी? हम बेखौफ़ होकर किसानों के इस चल रहे संघर्ष की ग्राउंड रिपोर्ट जनता तक पहुँचाते रहेंगे!

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