गुजरात में मॉनसून की शुरुआत के साथ ही जानलेवा चांदीपुरा वायरस ने अपना खतरनाक रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य में अब तक इस वायरस से 3 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मेहसाणा के वडनगर सिविल अस्पताल में एक और बच्चे के चांदीपुरा वायरस से संक्रमित पाए जाने पर उसे तुरंत आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर गहन इलाज शुरू किया गया।
प्रशासन ने 61 पुराने हॉटस्पॉट इलाकों की पहचान की है और युद्धस्तर पर सर्वे करने के साथ-साथ मक्खियों और मच्छरों को खत्म करने के लिए फॉगिंग और पाउडर छिड़काव का काम किया है।
ये 6 उपाय अपनाएं और अपने मासूम बच्चों को चांदीपुरा वायरस के खतरे से बचाएं
यह वायरस मुख्य रूप से 9 महीने से 14 साल तक के बच्चों को अपना शिकार बनाता है और सैंडफ्लाई (रेत की मक्खी) के काटने से फैलता है। बच्चों को इस जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए माता-पिता का ये 6 सावधानियां बरतना बहुत ज़रूरी है:
- बच्चों को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं: इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे ऐसे कपड़े पहनें जिनसे उनका पूरा शरीर ढका रहे और हाथ-पैर खुले न रहें, ताकि मक्खियां या मच्छर उन्हें काट न सकें।
- घर और आसपास सफाई रखें: सैंडफ्लाई अक्सर कच्चे घरों की दरारों, कचरे और नमी वाली जगहों पर पाई जाती हैं। इसलिए, घर में कहीं भी गंदगी या नमी न रहने दें।
- मच्छरदानी का इस्तेमाल करें: जब भी बच्चे सोएं, चाहे रात हो या दिन, मच्छरदानी का इस्तेमाल ज़रूर करें और खिड़कियों व दरवाजों पर जाली लगवाएं।
- मिट्टी और धूल में खेलने से बचें: ये मक्खियां रेत और मिट्टी के आसपास ज़्यादा होती हैं, इसलिए इन दिनों बच्चों को बाहर धूल और गंदगी में न खेलने दें।
- इम्यूनिटी बढ़ाने वाला खाना दें: बच्चों को पौष्टिक और गर्म खाना दें, ताकि उनकी इम्यूनिटी मज़बूत रहे और शरीर वायरस से लड़ सके।
- लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें: अगर बच्चे को अचानक तेज़ बुखार, उल्टी, असहनीय सिरदर्द या चक्कर आने जैसी समस्या हो, तो घरेलू नुस्खे आज़माने के बजाय बिना एक मिनट बर्बाद किए नज़दीकी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल ले जाएं। इसमें देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
महानगर मेट्रो न्यूज़ ओपिनियन:
चांदीपुरा वायरस से 3 बच्चों की मौत पूरे गुजरात के लिए खतरे की घंटी है। भले ही सिस्टम 61 हॉटस्पॉट इलाकों में सर्वे करने का दावा कर रहा हो, लेकिन असली सुरक्षा हमारे अपने हाथों में है। माता-पिता के तौर पर जागरूक रहना ही इस समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है। अपने बच्चे को सुरक्षित रखें और किसी भी आम लक्षण को हल्के में न लें!

