5 शहरों से MBA स्टूडेंट समेत 19 अपराधी गिरफ्तार, 21 राज्यों के 146 मामले सुलझाए गए!
गुजरात साइबर क्राइम और गांधीनगर CID ने एक जॉइंट ऑपरेशन चलाकर 250 करोड़ रुपये के इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो देश के इतिहास के सबसे बड़े डिजिटल स्कैम में से एक है। यह पूरा रैकेट भारत के बाहर, यानी दुबई से चलाया जा रहा था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए देश के 5 बड़े शहरों से 19 आदतन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नामी प्राइवेट यूनिवर्सिटी का MBA स्टूडेंट भी शामिल है।
इन गिरफ्तारियों के साथ ही भारत के 21 अलग-अलग राज्यों में दर्ज 146 जटिल मामले एक साथ सुलझा लिए गए हैं। ‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ की यह सनसनीखेज और खास रिपोर्ट…
रैकेट का काम करने का तरीका: दुबई से कम्युनिकेशन और पढ़े-लिखे युवाओं का इस्तेमाल
मिली जानकारी के मुताबिक, यह गैंग इतना हाई-टेक और शातिर था कि इसने न सिर्फ आम नागरिकों को, बल्कि बड़े अधिकारियों और व्यापारियों को भी ‘डिजिटल अरेस्ट’, शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच या लोन के बहाने अपना शिकार बनाया।
दुबई कनेक्शन: इस करोड़ों के फ्रॉड का मुख्य मास्टरमाइंड दुबई से ही पूरे सिस्टम को कंट्रोल कर रहा था।
बैंक अकाउंट्स का बड़ा नेटवर्क: भारत में गरीब और आम लोगों के नाम पर फर्जी डॉक्यूमेंट्स बनाकर सैकड़ों ‘डमी अकाउंट्स’ (किराये के अकाउंट्स) खोले गए थे, जिनमें धोखाधड़ी का पैसा ट्रांसफर किया जाता था और वहां से क्रिप्टोकरेंसी या हवाला के जरिए दुबई भेजा जाता था।
MBA स्टूडेंट बना मोहरा: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में एक नामी प्राइवेट यूनिवर्सिटी का MBA स्टूडेंट भी शामिल है, जो अपनी पढ़ाई और कमीशन के लालच में इस काले धंधे के अकाउंट्स संभाल रहा था।
5 शहरों में मेगा सर्च ऑपरेशन: 19 आरोपी सलाखों के पीछे
गुजरात साइबर सेल ने टेक्निकल एनालिसिस और ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर देश के 5 बड़े शहरों में एक साथ छापेमारी की। इस हाई-वोल्टेज ऑपरेशन में पुलिस ने 19 लोगों को रंगे हाथों पकड़ा है। उनके पास से दर्जनों मोबाइल फोन, सैकड़ों सिम कार्ड, ATM कार्ड, चेकबुक और लैपटॉप समेत कई चीजें जब्त की गई हैं। इस गैंग की गिरफ्तारी के साथ ही, देश भर की पुलिस जिन मामलों को सुलझाने की कोशिश कर रही थी, उनमें से 21 राज्यों के 146 साइबर क्राइम सीधे तौर पर इस गैंग से जुड़े पाए गए हैं।
महानगर मेट्रो न्यूज़ की राय
250 करोड़ रुपये की यह धोखाधड़ी दिखाती है कि साइबर माफिया अब हमारे घरों तक कितनी गहराई से पहुँच चुका है। यहाँ तक कि पढ़े-लिखे युवा भी जल्दी अमीर बनने के लालच में ऐसे अंतरराष्ट्रीय घोटालों का हिस्सा बन रहे हैं, जो समाज के लिए बहुत चिंता की बात है। इस बड़े ऑपरेशन के लिए गुजरात पुलिस और गांधीनगर साइबर टीम बधाई की पात्र है। लेकिन, पक्को गुजरात न्यूज़ जनता से यह भी अपील करता है कि अनजान नंबरों से आने वाले लिंक, इन्वेस्टमेंट स्कीम या डिजिटल अरेस्ट की धमकियों से डरने के बजाय जागरूक रहें, क्योंकि साइबर क्राइम के खिलाफ सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है!

