आज के आधुनिक दौर में हम जेंडर इक्वालिटी (स्त्री-पुरुष समानता) की बहुत बातें करते हैं। आज महिलाएं शिक्षा से लेकर प्रशासन तक हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। लेकिन, जब बात बेडरूम, प्यार और सेक्सुअल रिश्तों की आती है, तो हमारा पूरा समाज सदियों पुरानी रूढ़िवादी सोच में फंसा हुआ है। आज भी हमारे समाज में एक ऐसी अनकही सोच है कि चाहे प्यार का इज़हार करना हो, भावनाएं बतानी हों या शारीरिक संबंध बनाने हों, ‘पहल’ हमेशा पुरुष को ही करनी चाहिए। अगर कोई महिला पुरुष के सामने अपनी शारीरिक इच्छा ज़ाहिर करती है, तो उसे आज भी शक या नकारात्मक नज़रिए से देखा जाता है। लेकिन क्या यह सोच एक स्वस्थ शादी के लिए सही है?
पुरुषों के मन की अनकही इच्छाएं: अपनी पत्नी में ‘रंभा’ और ‘प्रेयसी’ की तलाश करता पति
पुराने ग्रंथों से लेकर आज की साइकोलॉजी तक, एक बात बार-बार सामने आई है कि ज़्यादातर पुरुष चाहते हैं कि बेडरूम में उनकी पत्नी ‘शयनेषु रंभा’ (बिस्तर पर अप्सरा जैसी) हो। इसका मतलब यह नहीं है कि वे सिर्फ़ अपनी संतुष्टि चाहते हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि उनकी पत्नी भी इस रिश्ते में उतनी ही उत्साहित और सक्रिय रहे। पुरुष भले ही अपनी पत्नी से इस विषय पर खुलकर बात करने में हिचकिचाएं, लेकिन उनके दिल में कहीं न कहीं यह ज़बरदस्त इच्छा होती है कि उनकी पत्नी कभी-कभी सारी बंदिशें और शर्म छोड़कर खुद आगे बढ़कर प्यार का संकेत दे। हर पति को यह अच्छा लगता है कि उसकी पत्नी सिर्फ़ घर की ज़िम्मेदारियां संभालने वाली गृहिणी बनकर न रहे, बल्कि कभी-कभी उसकी प्रेमिका बनकर उसे खुश भी करे।
जब रिश्ता सिर्फ़ ‘एकतरफ़ा फ़र्ज़’ बनकर रह जाए…
अब सिक्के का दूसरा पहलू भी देखिए। जब हर बार, हर दिन शारीरिक संबंध बनाने के लिए सिर्फ़ पति को ही पहल करनी पड़ती है, तो धीरे-धीरे उसके मन में एक अनजानी नकारात्मकता पैदा होने लगती है। पति सोचने पर मजबूर हो जाता है, “क्या मैं अपनी पत्नी के साथ यह सब बेकार में कर रहा हूं? क्या उसे मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं है?”
दूसरी ओर, दिन भर घर के कामों, बच्चों की ज़िम्मेदारियों या ऑफ़िस के काम से थकी-हारी पत्नी अक्सर बेडरूम में बेमन से लेटी रहती है और इसे सिर्फ़ एक ‘ज़िम्मेदारी’ मानती है। जब पत्नी बिस्तर पर बिना किसी उत्साह के ‘लाश’ की तरह पड़ी रहती है, तो पुरुष के मन से प्यार और जोश का दीया अपने आप बुझ जाता है। यही सुस्ती शादीशुदा ज़िंदगी में मानसिक दूरी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बन जाती है।
महिलाओं की शारीरिक इच्छा कोई अपराध नहीं है: शर्म छोड़ें, स्पर्श से माहौल बदलें
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि पुरुषों की तरह ही महिलाओं के शरीर में भी शारीरिक और मानसिक इच्छाओं का जागना पूरी तरह से स्वाभाविक और जैविक प्रक्रिया है। महिलाओं को इस डर से बाहर निकलना चाहिए कि अगर वे अपनी इच्छा ज़ाहिर करेंगी, तो उनके पति उनके चरित्र के बारे में क्या सोचेंगे। अगर आपको शब्दों में कहने में शर्म आती है, तो आपको बोलने की भी ज़रूरत नहीं है। रात में पति के करीब जाना, उन्हें प्यार से गले लगाना, उनके शरीर को स्नेह से छूना या उनकी गर्दन पर हाथ रखना – ऐसे छोटे-छोटे इशारे ही पुरुष को आपकी भावनाएं समझाने के लिए काफी हैं। पति को एक ऐसी साथी की ज़रूरत होती है जो उसकी मर्दानगी को समझे और उनके निजी पलों का सही ढंग से आनंद ले।
रिश्ते टूटने और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर (विवाह-बाहर संबंध) का असली कारण
आज समाज में तलाक और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे एक मुख्य और सबसे आम कारण बेडरूम में सुस्ती है। जब पुरुष को अपने ही घर से वह प्यार, जोश और संतुष्टि नहीं मिलती, तो वह बाहर भटकने के लिए प्रेरित होता है।
अगर पत्नी हर बार नहीं, तो कभी-कभी ही सही, अपनी इच्छा ज़ाहिर करे, तो पति को इससे अद्भुत मानसिक संतुष्टि और खुशी मिलेगी। उसका अहंकार संतुष्ट होगा कि उसकी पत्नी उससे प्यार करती है और उसे चाहती है। अगर हर महिला अपने पति को अपने सच्चे प्यार, आकर्षक अंदाज़ और उत्साह से बांधकर रखे, तो कोई भी पुरुष उसे लुभाने के लिए बाहर नहीं जाएगा।
निष्कर्ष: खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी के लिए सुनहरा मंत्र
शादीशुदा ज़िंदगी के रथ के दोनों पहिए बराबर होने चाहिए। शारीरिक और मानसिक संतुष्टि कोई पाप नहीं है, बल्कि एक मज़बूत गोंद है जो शादीशुदा ज़िंदगी को बनाए रखती है। महिला और पुरुष दोनों को एक-दूसरे की बारीकियों को समझना होगा। जब बेडरूम की चार दीवारों के बीच शर्म और झिझक की दीवार टूटती है, तभी प्यार का असली गुलाब खिलता है। अपने बीच कम हुए आकर्षण को फिर से जगाएं, शर्म छोड़ें और अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को हमेशा के लिए खुशहाल और रोमांटिक बनाएं।

