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जामजोधपुर में ‘108’ की ‘कुदरत’ से जंग: भारी बारिश और बंद रास्तों के कारण गर्भवती महिला की घर पर ही सफल डिलीवरी हुई

कीचड़ और दलदल में 500 मीटर तक स्ट्रेचर पर ले जाकर माँ और नवजात की जान बचाई गई! भारी बारिश के बीच 108 कर्मियों का ‘सिंघम’ जैसा जज़्बा

जामनगर / जामजोधपुर : एक तरफ जहाँ गुजरात में भारी बारिश ने तबाही मचाई है और रास्ते बंद कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ जामनगर के जामजोधपुर इलाके से इंसानियत और बहादुरी की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जो सलाम करने पर मजबूर कर देती हैं। भारी बारिश के कारण रास्ते बंद होने से एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। लेकिन कहावत है कि ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’… भगवान तो समय पर नहीं आए, लेकिन 108 एम्बुलेंस के बहादुर कर्मचारी भगवान बनकर पहुँचे और एक नई मिसाल कायम की!

जब एम्बुलेंस नहीं पहुँच पाई, तो ये ‘फरिश्ते’ पैदल दौड़े!

घटना की जानकारी यह है कि जामजोधपुर के ग्रामीण इलाके में एक गर्भवती महिला को अचानक असहनीय प्रसव पीड़ा हुई। परिवार ने तुरंत 108 पर कॉल किया। एम्बुलेंस तो निकली, लेकिन भारी बारिश के कारण गाँव की सड़क कीचड़ और पानी से भरी हुई थी, इसलिए गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी। एक पल भी बर्बाद किए बिना, 108 के इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) और पायलट ने एम्बुलेंस वहीं खड़ी की और डिलीवरी किट लेकर कीचड़ में से होते हुए पैदल ही गर्भवती महिला के घर की ओर दौड़े।

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घर पर सफल डिलीवरी: अस्पताल पहुँचने का समय नहीं था, इसलिए 108 की टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए घर के अंदर ही सफल और सुरक्षित डिलीवरी कराई। माँ ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

500 मीटर का मुश्किल सफर: डिलीवरी के बाद माँ और नवजात बच्चे को अस्पताल ले जाना ज़रूरी था। लेकिन बाहर घुटनों तक कीचड़ था।
बाहुबली जैसा साहस: स्थानीय लोगों की मदद से, 108 कर्मियों ने माँ और नवजात बच्चे को एक खाट पर लिटाया और उस खाट को अपने कंधों पर उठाकर
आधे किलोमीटर (500 मीटर) तक कीचड़ में से होते हुए एम्बुलेंस तक पहुँचाया!

इन नायकों को सलाम! जब तक ऐसे कर्मचारी गुजरात की धरती पर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, तब तक कोई भी प्राकृतिक आपदा जनता का कुछ नहीं बिगाड़ सकती। ‘पक्को गुजरात’ 108 सेवा के उन बहादुर जवानों को सलाम करता है, जिन्होंने कीचड़ और मुश्किल हालात की परवाह किए बिना और अपनी जान जोखिम में डालकर एक माँ और बच्चे की जान बचाई। फिलहाल, माँ और नवजात शिशु दोनों एक सुरक्षित अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं और जान बचने के बाद परिवार ने नम आँखों से 108 टीम का शुक्रिया अदा किया।

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