ग्लोबल एजेंसियों की कार्रवाई: लॉरेंस के इंटरनेशनल साम्राज्य पर सर्जिकल स्ट्राइक
न्यूयॉर्क / ओटावा / नई दिल्ली : ग्लोबल जांच एजेंसियों ने कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इंटरनेशनल क्राइम सिंडिकेट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। लॉरेंस भारतीय जेलों में बैठकर दुनिया भर में दहशत फैला रहा है। इंटरनेशनल एजेंसियों ने अमेरिका और भारत में मौजूद तीन बड़े संगठित अपराध समूहों के खिलाफ विदेशी धरती पर एक साथ कार्रवाई करते हुए लॉरेंस के नेटवर्क को तोड़ दिया है। अमेरिका, कनाडा और यूरोप के अलग-अलग देशों से एक-दो नहीं, बल्कि 24 हाई-प्रोफाइल संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे हड़कंप मच गया है।
अमेरिका से कनाडा तक ऑपरेशन ‘क्लीन अप’
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, यह ऑपरेशन इतना गुप्त और ज़बरदस्त था कि लॉरेंस के साथियों को भागने का मौका ही नहीं मिला। गिरफ्तार किए गए सभी 24 लोग सीधे तौर पर लॉरेंस बिश्नोई और भारत में मौजूद अन्य संगठित अपराध समूहों से जुड़े थे।
ग्लोबल फंडिंग और हथियारों का नेटवर्क: ये संदिग्ध टारगेट किलिंग, रंगदारी, ड्रग तस्करी और विदेश से भारत में आधुनिक हथियार सप्लाई करने का एक बड़ा नेटवर्क चला रहे थे।
अमेरिकी जेलों से चल रहा सिंडिकेट: भारतीय जेलों से लेकर अमेरिका और कनाडा तक फैले इस पूरे नेटवर्क के खुलासे ने अब पश्चिमी देशों की सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है।
‘महानगर मेट्रो ’ इनसाइड स्टोरी: क्यों हिल गया बिश्नोई का साम्राज्य?
तीन देश, एक कार्रवाई: अमेरिका की FBI, कनाडा की पुलिस और यूरोपीय एजेंसियों ने मिलकर ऑपरेशन चलाया।
भारत के 3 गैंग पर कार्रवाई: न सिर्फ लॉरेंस, बल्कि उससे जुड़े तीन अन्य गैंगस्टर समूहों की जड़ें भी उखाड़ दी गई हैं।
बड़े खुलासे की आशंका: इन 24 इंटरनेशनल अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद, विदेश में पनाह लिए हुए खालिस्तानी तत्वों और अंडरवर्ल्ड के बीच का कनेक्शन भी बड़े पैमाने पर सामने आएगा।
अब लॉरेंस की मुश्किलें दोगुनी: गैंगस्टर चारों तरफ से घिरा!
भारत में सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस से लेकर कई हाई-प्रोफाइल मर्डर केस और बॉलीवुड सेलेब्स को धमकी देने तक, लॉरेंस बिश्नोई चर्चा में रहा है। लेकिन अब यह मामला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। विदेश में 24 साथियों की गिरफ्तारी से यह साबित होता है कि लॉरेंस गैंग का डेथ वारंट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी हो चुका है। भारत में जेल में बंद लॉरेंस को विदेश से मिलने वाली आर्थिक और लॉजिस्टिकल मदद अब पूरी तरह बंद हो गई है।

