क्या इस देश में किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा, सदियों पुरानी धार्मिक आस्था और तपस्वी संतों की पवित्रता इतनी सस्ती हो गई है कि कोई भी एरा-गेरा आकर उस पर कीचड़ उछाल दे? ‘महानगर मेट्रो’ आज एक ऐसी सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाली साजिश का लाइव भंडाफोड़ कर रहा है, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ पूज्य ‘सागर समुदाय’ को ब्लैकमेल करना और उनसे करोड़ों की रंगदारी वसूलना था।
पैसों की भूख में अंधे हो चुके इन गुर्गों ने पवित्र आस्था पर जो घातक प्रहार किया है, उसका एक-एक सबूत आज हम जनता की अदालत में बेनकाब करने जा रहे हैं।
ब्लैकमेलिंग गैंग की शातिर मोडस ऑपरेंडी: आधुनिक हथियारों से चरित्र हनन
इस गैंग के काम करने का तरीका इतना शातिर और खतरनाक है कि कोई भी शरीफ इंसान दहल जाए। ये डिजिटल डकैत सबसे पहले आधुनिक तकनीक, एडिटिंग टूल्स और AI का दुरुपयोग करके फर्जी वीडियो और मॉर्फ्ड (फर्जी) तस्वीरें तैयार करते हैं। इसके बाद पर्दे के पीछे से शुरू होता है ब्लैकमेलिंग का गंदा और काला धंधा।
जब सामने वाला पक्ष इनकी अवैध वसूली, धमकियों और करोड़ों की रंगदारी के आगे नहीं झुकता, तो ये लोग समाज में पूजनीय संतों का चरित्र हनन करने के लिए वो फर्जी मटेरियल सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं। यह न्याय की लड़ाई नहीं, यह सिर्फ सस्ते व्यूज और उगाही के लिए खेला जाने वाला ‘डिजिटल मर्डर’ है!
गैंग के मुख्य सरगनाओं की कुंडली: देखिए इन चेहरों को!
जब ‘महानगर मेट्रो’ की इन्वेस्टिगेटिव टीम ने इस पूरी साजिश की कड़ियों को जोड़ा, तो इसके पीछे दो मुख्य चेहरे बेनकाब हुए:
१. जगत पारेख (अहमदाबाद): इस पूरी गंदी साजिश का मुख्य स्क्रिप्ट राइटर। यह वही शख्स है जिस पर पहले से ही धोखाधड़ी (फ्रॉड) और कई क्रिमिनल केस दर्ज हैं। जिसकी खुद की कानून की नजर में कोई औकात या साख नहीं है, वह समाज के पवित्र संतों की साख पर हमला करने निकला था।
२. हार्दिक हुंडिया (मुंबई): मुंबई की चकाचौंध में बैठकर, डिजिटल आईडी के पीछे छुपकर इस पूरे ब्लैकमेलिंग नेटवर्क को डिजिटल सपोर्ट और हवा-पानी देने का पाप यह शख्स कर रहा है।
‘महानगर मेट्रो’ ने इन कायरों को बंद कमरों से बाहर आकर खुले मैदान में सबूत पेश करने की सीधी चुनौती दी थी, लेकिन सबूत के नाम पर इस गैंग के पास सिर्फ शून्य था!
ऑन-फोन इंटरव्यू: तीखे सवालों के आगे मास्टरमाइंड जगत पारेख घुटनों पर!
जब हमारी टीम ने इस साजिश के मुख्य सूत्रधार जगत पारेख से फोन पर सीधा संपर्क किया, तो हमारे सवालों की एक ही तोप से उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। ‘महानगर मेट्रो’ के प्रतिनिधि ने जब उससे कान फाड़ देने वाला सीधा सवाल पूछा कि:
“तुमने कोर्ट में याचिका दायर करके परम पूजनीय जैन मुनि सागरचंद्र सागर आचार्य जी पर अश्लील वीडियो विदेश में बेचने का इतना गंभीर और घटिया आरोप लगाया… क्या इसका एक भी ठोस फॉरेंसिक या डिजिटल सबूत तुम्हारे पास है? अगर है, तो अभी के अभी दिखाओ!”
इस तीखे सवाल पर जगत पारेख हक्का-बक्का रह गया, कांप उठा। ऑन-रिकॉर्ड बातचीत में उसने जो उगला है, वह कानून और न्याय व्यवस्था के मुंह पर एक करारा तमाचा है। उसने घुटनों पर आते हुए स्वीकार किया कि उसके पास कोई भी पुख्ता सबूत नहीं है! उसने कायरों जैसा जवाब देते हुए कहा—”हमें ऐसा लगा कि शायद ऐसा हो सकता है।”
जब पूछा गया कि बिना सबूत के इतना घिनौना आरोप लगाने की हिम्मत कैसे हुई? तो इस पापी का जवाब सुनिए—उसने कहा कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री के राज कुंद्रा का अश्लील वीडियो वाला मामला मीडिया में छाया हुआ था, उसे देखकर मुझे लगा कि शायद आचार्य सागरचंद्र सागर भी ऐसा ही कुछ कर रहे होंगे!
सोचिए, यह कितनी विकृत मानसिकता है! टीवी पर कोई क्राइम न्यूज देखकर, अपने वहम के आधार पर एक कठिन तपस्या करने वाले संत पर इतना बड़ा लांछन लगा देना एक अक्षम्य पाप है।
अदालत और समाज के साथ अक्षम्य खिलवाड़
अदालतें सबूतों और कानून पर चलती हैं, किसी ब्लैकमेलर के कमजोर अंदाजे या वहम पर नहीं। किसी संत को बदनाम करने के लिए कोर्ट के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना देश की न्याय प्रणाली का मजाक उड़ाने जैसा है। इस गैंग का मकसद कभी न्याय पाना था ही नहीं, इनका एकमात्र मकसद पूज्य आचार्य श्री को बदनाम करने की धमकी देकर सागर समुदाय से करोड़ों रुपये ऐंठना था। लेकिन अब पाप का घड़ा भर चुका है और इस टोली को कानून के शिकंजे से कोई बचा नहीं पाएगा।

