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राजनांदगांव। शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री हेमंत ओस्तवाल ने एक पत्र के माध्यम् से जिले के कलेक्टर से की मांग

राजनांदगांव। शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री हेमंत ओस्तवाल ने एक पत्र के माध्यम् से जिले के कलेक्टर से यह मांग की है कि पूर्व में मेरे द्वारा पत्र के माध्यम् से निगम आयुक्त महापौर सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं जिले के कलेक्टर आदि से लगभग १० करोड़ ४ लाख ३४ हजार रूपये की जो स्वीकृति निगम सीमा क्षेत्र में ४१ सडक़ों के सडक़ डामरीकरण की स्वीकृति ०३/०९/२०२४ को निगम को प्राप्त हुई और निगम आयुक्त व कार्यपालन अभियंता के द्वारा समाचार पत्रों में यह कहा जा रहा है कि २७ सडक़ों का निर्माण हो गया है और १४ सडक़ों के लिये टेंडर लगाया जा रहा है तो सच्चाई क्या है इसको जिले के कलेक्टर को आम जनता और शासन हित में निगम के भ्रष्ट आयुक्त और संविदा कार्यपालन अभियंता श्री यू.के. रामटेके एवं कार्यपालन अभियंता दीपक खांडे आदि अधिकारियों की जो मिलीभगत के चलते १० करोड़ के सडक़ डामरीकरण में निविदा टेंडर और गुणवत्ताहिन सडक़ निर्माण करने वाले ठेकेदारों से साठ-गांठ करके करोड़ों रूपयों का भ्रष्टाचार किया गया है?

और निविदा टेंडर में शासन से स्वीकृति के विरूद्ध निविदा टेंडर में जो लाभ ठेकेदारों को पहुंचाकर भ्रष्टाचार किया गया है जबकि ठेकेदार दास प्रोसेस वर्धमान नगर को अनुबंध-कार्यादेश निरस्तीकरण आदेश जो उक्त ठेकेदार को ०३ वर्ष के लिये काली सूची में डालने का आदेश क्रमांक ७७७/लोक-११/२०२५-२६ राजनांदगांव दिनांक १८/०८/२०२५ को आयुक्त अतुल विश्वकर्मा के हस्ताक्षर से काली सूची (ब्लैक लिस्टेड) किया जाने का आदेश जारी किया गया। वही दूसरी ओर अभय कोटडिया आदि जिन ठेकेदार के पास न तो सडक़ डामरीकरण से संबंधित हॉट मिक्सिंग प्लांट ही नही है फिर ठेकेदारों को कार्यादेश जो जारी किया गया है शासन के किन शर्तों के आधार पर जारी किया गया उसकी जांच होनी चाहिये पूर्व में मेरे द्वारा दिनांक २३/०३/२०२६ को शिकायत पत्र दिया गया था उस पत्र को संज्ञान में लेते हुए जिले के कलेक्टर से चाहूंगा कि तत्काल भ्रष्ट अधिकारी और ठेकेदारों आदि के खिलाफ जांच का आदेश जारी करवाए और जिस तरह आज के समाचार पत्रों में निगम के महापौर श्री मधुसूदन यादव के द्वारा सडक़ डामरीकरण करने से संबंधित ठेकेदारों की बैठक लेकर जिस तरह से हाथ पैर जोड़ते हुए निवेदन किया जा रहा है कि बरसात के पूर्व शेष बची सडक़ो का डामरीकरण करने का निवेदन ठेकेदारों से किया गया और ठेकेदारों ने अपनी तकलीफ बताते हुए बम्बई आदि क्षेत्रों से डामर आदि आने की तकलीफ बताई जबकि बरसात सिर पर आ गई है और १५ जुन के बाद सडक़ डामरीकरण पर पूरी तरह शासन द्वारा प्रतिबंध लग जाता है तो महापौर मधुसूदन यादव यह बैठक भी दिन में लेने की बजाय क्या रात में ली गई ?

जहां एक ओर उस बैठक में काली सूची में जिस ठेकेदार को डाला गया वह ठेकेदार उस बैठक में कैसे उपस्थित है क्या काली सूची का मामला निगम के भ्रष्ट आयुक्त/संविदा कार्यपालन अभियंता श्री यू.के. रामटेके एवं कार्यपालन अभियंता दीपक खांडे आदि के द्वारा महापौर मधुसूदन के इशारे पर कितनी मोटी रकम लेकर उक्त ठेकेदार दास प्रोसेस के काली सूची के मामले को दबा दिया गया? या उक्त ठेकेदार आज भी काली सूची में है या काली सूची से बाहर हो गया या मामला कहा लंबित है उसका खुलासा कलेक्टर साहब को कराना होगा। वही दूसरा ठेकेदार अभय कोटडिसा जिसके पास स्वयं का हाट मिक्सिंग प्लांट एवं मशीनरी आदि नही है?

उसके बावजूद वह भी उस बैठक में उपस्थित है इससे स्वयंमेव यह प्रमाणित हो जाता है कि महापौर मधुसूदन यादव कड़ी कार्यवाही की हिम्मत नही रखते है और यदि हिम्मत है तो शहर की जनता को चमचमाती हुई सडक़ डामरीकरण बरसात के पूर्व गुणवत्तापूर्ण निर्माण करवाकर दिखाये और यदि नही दिखा पाते तो शहर की जनता को समझ में आ जायेगा कि महापौर के हाथ कुछ ठेकेदारों और निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के हाथ में फंसा हुआ है ? इस कारण महापौर खाली फोटो छपाकर निर्देश दे रहे है मगर उनकी स्थिति यह है कि निगम का चपरासी भी उनके निर्देशों का पालन नही कर रहा है ? तो आयुक्त और संविदा भ्रष्ट अधिकारी श्री यू.के. रामटेके तो भ्रष्टाचार करने और भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने में महारथ हासिल है इसलिये तो रिटायर अधिकारी को काला पीला करने के लिये संविदा में लाकर निगम आयुक्त और महापौर ने एक महायुद्ध जीत लिया एवं महापौर श्री यादव आम जनता का विकास खाली मुंह जबानी में करना जानते है धरातल पर स्थायी सुविधा आम जनता को नही दिला सकते है

यह सडक़ डामरीकरण उसका सबसे बड़ा प्रमाण है।राजनांदगांव। शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री हेमंत ओस्तवाल ने एक पत्र के माध्यम् से जिले के कलेक्टर से यह मांग की है कि पूर्व में मेरे द्वारा पत्र के माध्यम् से निगम आयुक्त महापौर सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं जिले के कलेक्टर आदि से लगभग १० करोड़ ४ लाख ३४ हजार रूपये की जो स्वीकृति निगम सीमा क्षेत्र में ४१ सडक़ों के सडक़ डामरीकरण की स्वीकृति ०३/०९/२०२४ को निगम को प्राप्त हुई और निगम आयुक्त व कार्यपालन अभियंता के द्वारा समाचार पत्रों में यह कहा जा रहा है कि २७ सडक़ों का निर्माण हो गया है और १४ सडक़ों के लिये टेंडर लगाया जा रहा है तो सच्चाई क्या है इसको जिले के कलेक्टर को आम जनता और शासन हित में निगम के भ्रष्ट आयुक्त और संविदा कार्यपालन अभियंता श्री यू.के. रामटेके एवं कार्यपालन अभियंता दीपक खांडे आदि अधिकारियों की जो मिलीभगत के चलते १० करोड़ के सडक़ डामरीकरण में निविदा टेंडर और गुणवत्ताहिन सडक़ निर्माण करने वाले ठेकेदारों से साठ-गांठ करके करोड़ों रूपयों का भ्रष्टाचार किया गया है? और निविदा टेंडर में शासन से स्वीकृति के विरूद्ध निविदा टेंडर में जो लाभ ठेकेदारों को पहुंचाकर भ्रष्टाचार किया गया है

जबकि ठेकेदार दास प्रोसेस वर्धमान नगर को अनुबंध-कार्यादेश निरस्तीकरण आदेश जो उक्त ठेकेदार को ०३ वर्ष के लिये काली सूची में डालने का आदेश क्रमांक ७७७/लोक-११/२०२५-२६ राजनांदगांव दिनांक १८/०८/२०२५ को आयुक्त अतुल विश्वकर्मा के हस्ताक्षर से काली सूची (ब्लैक लिस्टेड) किया जाने का आदेश जारी किया गया। वही दूसरी ओर अभय कोटडिया आदि जिन ठेकेदार के पास न तो सडक़ डामरीकरण से संबंधित हॉट मिक्सिंग प्लांट ही नही है फिर ठेकेदारों को कार्यादेश जो जारी किया गया है शासन के किन शर्तों के आधार पर जारी किया गया उसकी जांच होनी चाहिये पूर्व में मेरे द्वारा दिनांक २३/०३/२०२६ को शिकायत पत्र दिया गया था उस पत्र को संज्ञान में लेते हुए जिले के कलेक्टर से चाहूंगा कि तत्काल भ्रष्ट अधिकारी और ठेकेदारों आदि के खिलाफ जांच का आदेश जारी करवाए और जिस तरह आज के समाचार पत्रों में निगम के महापौर श्री मधुसूदन यादव के द्वारा सडक़ डामरीकरण करने से संबंधित ठेकेदारों की बैठक लेकर जिस तरह से हाथ पैर जोड़ते हुए निवेदन किया जा रहा है कि बरसात के पूर्व शेष बची सडक़ो का डामरीकरण करने का निवेदन ठेकेदारों से किया गया और ठेकेदारों ने अपनी तकलीफ बताते हुए बम्बई आदि क्षेत्रों से डामर आदि आने की तकलीफ बताई जबकि बरसात सिर पर आ गई है

और १५ जुन के बाद सडक़ डामरीकरण पर पूरी तरह शासन द्वारा प्रतिबंध लग जाता है तो महापौर मधुसूदन यादव यह बैठक भी दिन में लेने की बजाय क्या रात में ली गई ? जहां एक ओर उस बैठक में काली सूची में जिस ठेकेदार को डाला गया वह ठेकेदार उस बैठक में कैसे उपस्थित है क्या काली सूची का मामला निगम के भ्रष्ट आयुक्त/संविदा कार्यपालन अभियंता श्री यू.के. रामटेके एवं कार्यपालन अभियंता दीपक खांडे आदि के द्वारा महापौर मधुसूदन के इशारे पर कितनी मोटी रकम लेकर उक्त ठेकेदार दास प्रोसेस के काली सूची के मामले को दबा दिया गया? या उक्त ठेकेदार आज भी काली सूची में है या काली सूची से बाहर हो गया या मामला कहा लंबित है उसका खुलासा कलेक्टर साहब को कराना होगा। वही दूसरा ठेकेदार अभय कोटडिसा जिसके पास स्वयं का हाट मिक्सिंग प्लांट एवं मशीनरी आदि नही है? उसके बावजूद वह भी उस बैठक में उपस्थित है इससे स्वयंमेव यह प्रमाणित हो जाता है कि महापौर मधुसूदन यादव कड़ी कार्यवाही की हिम्मत नही रखते है और यदि हिम्मत है तो शहर की जनता को चमचमाती हुई सडक़ डामरीकरण बरसात के पूर्व गुणवत्तापूर्ण निर्माण करवाकर दिखाये और यदि नही दिखा पाते तो शहर की जनता को समझ में आ जायेगा कि महापौर के हाथ कुछ ठेकेदारों और निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के हाथ में फंसा हुआ है ? इस कारण महापौर खाली फोटो छपाकर निर्देश दे रहे है मगर उनकी स्थिति यह है कि निगम का चपरासी भी उनके निर्देशों का पालन नही कर रहा है ? तो आयुक्त और संविदा भ्रष्ट अधिकारी श्री यू.के. रामटेके तो भ्रष्टाचार करने और भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने में महारथ हासिल है इसलिये तो रिटायर अधिकारी को काला पीला करने के लिये संविदा में लाकर निगम आयुक्त और महापौर ने एक महायुद्ध जीत लिया एवं महापौर श्री यादव आम जनता का विकास खाली मुंह जबानी में करना जानते है धरातल पर स्थायी सुविधा आम जनता को नही दिला सकते है यह सडक़ डामरीकरण उसका सबसे बड़ा प्रमाण है।

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