करोड़ों की वसूली, हनीट्रैप की जालसाजी और धर्म की बलि; गुजरात के सबसे बड़े ‘सिंडिकेट’ का होगा सरेआम पोस्टमार्टम!
अहमदाबाद | विशेष जांच ब्यूरो : सावधान गुजरात! सावधान जैन जगत! जिस धर्म और आस्था की बुनियाद पर हम गर्व करते हैं, उसी की पीठ में खंजर घोंपने वाले ‘सफेदपोश कसाइयों’ की एक ऐसी फौज सक्रिय हुई है, जिसका काम संतों को पूजना नहीं बल्कि उन्हें ‘हनीट्रैप’ के दलदल में धकेल कर अपनी तिजोरियां भरना है। मुनि राजतिलक सागरजी महाराज के खिलाफ रचा गया यह चक्रव्यूह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘ब्लैकमेलिंग इंडस्ट्री’ का प्रोडक्ट है।
हलफनामा नहीं, पाप का दस्तावेज है!
किरण दोषी और उनकी पत्नी के जो हलफनामे (Affidavit) ‘महानगर मेट्रो’ के हाथ लगे हैं, वे जांच के ताबूत में आखिरी कील साबित होने वाले हैं। इन दस्तावेजों ने यह नग्न सत्य उजागर कर दिया है कि FIR सिर्फ एक ‘रेट कार्ड’ था।
क्या धर्म के ठेकेदारों ने मुनि की मर्यादा की कीमत लगा दी थी?
क्या संतों के संयम को ‘कैश’ कराने के लिए इस स्क्रिप्ट को लिखा गया?
इन हलफनामों की स्याही चीख-चीख कर कह रही है कि असली अपराधी वे नहीं जो कटघरे में खड़े हैं, बल्कि वे हैं जो ‘विक्टिम कार्ड’ खेल कर करोड़ों का खेल खेल रहे थे।
गिरोह के ‘खलनायक’: हार्दिक हुडिया एंड कंपनी के दिन गिनती के!
सूत्रों की मानें तो इस महा-षड्यंत्र के सूत्रधारों— हार्दिक हुडिया, जगत पारेख, विक्रम सिंघवी और विक्रम बाफना— की रातों की नींद और दिन का चैन छिन चुका है। ये वे नाम हैं जिन पर उंगलियां नहीं, बल्कि अब जांच की तलवार लटक रही है।
“यह गिरोह समझता था कि वे संतों को डराकर करोड़ों वसूल लेंगे और समाज तमाशबीन बना रहेगा। लेकिन वे भूल गए कि जब पाप का घड़ा भरता है, तो उसकी गूंज दिल्ली तक जाती है।”
ये ‘सफेदपोश गुंडे’ अब कानूनी शिकंजे से बचने के लिए बिलों में छिपने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन ‘महानगर मेट्रो’ की पैनी नजर इनके हर ‘सेटलमेंट’ के खेल को नाकाम कर देगी।
धमकियों से नहीं थमेगी कलम: षड्यंत्रकारी जान लें!
जैसे ही इस सिंडिकेट के नकाब उतरने शुरू हुए, धमकियों और दबाव का ‘डर्टी गेम’ शुरू हो चुका है। अफवाहों का बाजार गर्म है और जांच को भटकाने के लिए पैसे का नग्न नाच किया जा रहा है। पर सुन लो षड्यंत्रकारियों…
“तुम्हारे पास करोड़ों की ताकत होगी, पर हमारे पास ‘सत्य’ का बारूद है। तुम्हारी धमकियां हमें डराएंगी नहीं, बल्कि तुम्हारे अंत को और करीब लाएंगी। जैन शासन की अस्मिता से खेलने वालों को पाताल से भी खोज निकालेंगे।” : पवन माकन (ग्रुप एडिटर, महानगर मेट्रो)
समाज का महा-संग्राम: ‘अब चुप रहना भी पाप है’
इस कांड के बाद पूरे देश के जैन समाज में ‘आक्रोश की ज्वाला’ भड़क उठी है। समाज के हर कोने से एक ही आवाज उठ रही है— “धर्म को धंधा बनाने वालों का सामाजिक बहिष्कार हो।” यह लड़ाई सिर्फ एक मुनि की छवि की नहीं है, यह लड़ाई उस हर पाखंडी के खिलाफ है जो भगवा और श्वेत वस्त्रों की गरिमा को अपनी तिजोरी की चाबी समझता है।
महानगर मेट्रो के ‘जहरीले’ सवाल:
1 मास्टरमाइंड का ठिकाना: इस सिंडिकेट के पीछे कौन सा ‘अदृश्य हाथ’ है जो पुलिस और सिस्टम को भी ठेंगा दिखा रहा है?
2 वसूली की लिस्ट: मुनि राजतिलक सागरजी से पहले इस गिरोह ने और कितने संतों को अपना शिकार बनाया और उनसे कितने करोड़ डकारे?
3 सिस्टम का साथ: क्या खाकी की आड़ में भी कुछ ‘भेड़िए’ इस ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट को ऑक्सीजन दे रहे हैं?
धमाका अभी बाकी है…
षड्यंत्र की परतें अभी और खुलेंगी। कौन-कौन से बड़े नाम इस गटर में हाथ धो रहे हैं, इसका खुलासा हम अगली कड़की में करेंगे।
देखते रहिए ‘पाक्को गुजरात’ और ‘महानगर मेट्रो’ की महा-पड़ताल!

