षड्यंत्रकारी सावधान! मुनि को फंसाने के लिए रचा गया था करोड़ों का ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट; ‘महानगर मेट्रो’ की जांच में सफेदपोशों के उतरे नकाब!
अहमदाबाद | विशेष प्रतिनिधि : जैन शासन की आस्था पर प्रहार करने वाले अब सावधान हो जाएं! जैन मुनि राजतिलक सागरजी महाराज को हनीट्रैप में फंसाने, उनकी छवि धूमिल करने और उनसे करोड़ों रुपये वसूलने के जिस गंदे खेल की शुरुआत हुई थी, उसका अब पर्दाफाश हो चुका है। यह कोई साधारण मामला नहीं है, बल्कि प्रभावशाली संतों को निशाना बनाकर ‘सेटलमेंट’ के नाम पर दुकान चलाने वाले एक संगठित ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का भंडाफोड़ है।
हलफनामे ने मचाया हड़कंप: FIR की नीयत पर सवाल!
इस मामले में शिकायतकर्ता किरण दोषी और उनकी पत्नी के जो कथित हलफनामे (Affidavit) सामने आए हैं, उन्होंने पूरी जांच की दिशा ही बदल दी है। ये दस्तावेज चीख-चीख कर कह रहे हैं कि इस केस में जो दिख रहा है वह सच नहीं है, और जो सच है वह अत्यंत भयावह है।
क्या यह FIR मात्र मुनि पर दबाव बनाने का एक हथियार थी?
करोड़ों की इस अवैध उगाही के पीछे असली ‘मास्टरमाइंड’ कौन है?
इन सवालों ने आज जैन समाज और पुलिस महकमे में भारी हलचल मचा दी है।
हार्दिक हुडिया एंड कंपनी: इन नामों पर क्यों उठ रही है उंगली?
सूत्रों के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल कांड में हार्दिक हुडिया, जगत पारेख, विक्रम सिंघवी और विक्रम बाफना जैसे नाम चर्चा के केंद्र में हैं। क्या ये लोग ही पर्दे के पीछे रहकर पूरी स्क्रिप्ट लिख रहे थे? जैसे-जैसे जांच की आंच तेज हो रही है, इन नामों में खौफ साफ देखा जा सकता है। माना जा रहा है कि सत्य सामने आते ही कई रसूखदार चेहरों पर से मुखौटे उतर जाएंगे।
सत्य आते ही बौखलाहट: धमकियों का दौर शुरू!
जैसे-जैसे ‘महानगर मेट्रो’ और मीडिया इस केस की तह तक पहुंच रहे हैं, षड्यंत्रकारियों में घबराहट बढ़ती जा रही है। अफवाहें फैलाना, मीडिया पर दबाव बनाना और जांच को गुमराह करने के हर संभव पैंतरे आजमाए जा रहे हैं। लेकिन याद रहे…
“सत्य का गला घोंटने वाले जान लें कि पत्रकारिता का कैमरा और कलम किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे। हर पाप का हिसाब सार्वजनिक रूप से होगा।”
पवन माकन (ग्रुप एडिटर, महानगर मेट्रो)
जैन समाज में उबाल: धर्म के नाम पर धंधा नहीं चलेगा
इस घटना के बाद पूरे जैन समाज में भारी रोष है। समाज के अग्रणी नेता एक स्वर में कह रहे हैं कि संतों की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। धर्म की आड़ में चल रही इस गंदी राजनीति का अंत होना अब निश्चित है।
‘महानगर मेट्रो’ के तीखे सवाल:
1 क्या पुलिस इस ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट के अंतिम सिरे तक पहुंच पाएगी?
2 करोड़ों के सेटलमेंट का खेल खेलने वाले ‘सफेदपोश गुंडे’ क्या जेल की सलाखों के पीछे जाएंगे?
3 क्या जांच एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस नेटवर्क को ध्वस्त कर पाएंगी?
सत्य अभी और भी है… देखते रहिए ‘पाक्को गुजरात’ और ‘महानगर मेट्रो’ की विशेष पड़ताल!

