कानून-व्यवस्था पर पुलिस अधिकारियों के साथ हाई-लेवल बैठक; अतिक्रमण और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर सरकार सख्त
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। पुलिस के आला अधिकारियों के साथ हुई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य में सार्वजनिक सड़कों को बाधित कर नमाज़ या किसी भी अन्य धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रमुख बिंदु: बैठक के कड़े निर्देश
मुख्यमंत्री ने बैठक में पुलिस अधिकारियों को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिए:
सड़कों पर नो-कॉम्प्रोमाइज: किसी भी परिस्थिति में यातायात बाधित कर सड़कों पर धार्मिक आयोजन नहीं होंगे। सार्वजनिक सड़कों का उपयोग केवल आवागमन के लिए सुरक्षित किया जाए।
अतिक्रमण पर प्रहार: फुटपाथों और मुख्य मार्गों पर बढ़ते अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
समान कानून व्यवस्था: मुख्यमंत्री ने संदेश दिया कि कानून सबके लिए समान है और सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) में बाधा डालने वाले तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा।
“सड़कें आवाजाही के लिए हैं, इबादत के लिए नहीं”
बैठक के बाद सूत्रों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस विभाग को कड़े शब्दों में कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों का धार्मिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने से आम नागरिकों को भारी परेशानी होती है। सरकार का मुख्य लक्ष्य आम जनता को निर्बाध यातायात और सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष और जनता की प्रतिक्रिया
सरकार के इस फैसले से प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जहाँ एक वर्ग इसे ‘अनुशासन और नागरिक अधिकार’ की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय आने वाले समय में राज्य की राजनीति को नई दिशा देगा।
“हमारा प्राथमिक कर्तव्य नागरिकों की सुविधा और कानून का शासन स्थापित करना है। अतिक्रमण और सार्वजनिक असुविधा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के सूत्रों से

