Homeक्राइममोरबी में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, पांच आरोपी गिरफ्तार

मोरबी में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, पांच आरोपी गिरफ्तार

22 बैंक खातों के जरिए दो साल में 7.26 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा; किराए पर खाते लेकर साइबर ठगी की रकम घुमाने का आरोप

मोरबी। गुजरात के मोरबी जिले में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम पुलिस ने बैंक खाते किराए पर लेकर करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेनदेन करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि गिरोह ने पिछले दो वर्षों के दौरान 22 अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल कर करीब 7 करोड़ 26 लाख रुपए के संदिग्ध लेनदेन किए।

पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से गरीब तथा बेरोजगार लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके अलावा कुछ लोगों के पहले से संचालित बैंक खाते भी किराए पर लिए जाते थे। बाद में इन खातों का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर आरोपियों द्वारा देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम जमा कराई जाती थी।

आरोप है कि इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन व्यापार के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी और डिजिटल गिरफ्तारी जैसे साइबर अपराधों से प्राप्त रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था। रकम को अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित करने के बाद नकदी, क्रिप्टोकरेंसी या हवाला के माध्यम से आगे भेजे जाने की आशंका है। इस तरह गिरोह साइबर ठगी करने वालों और उनके पैसों को आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क के बीच कड़ी का काम कर रहा था।

पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों की तकनीकी जांच में दो वर्षों के दौरान 22 खातों से 7.26 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन सामने आए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम किन लोगों से प्राप्त हुई और किन राज्यों या अन्य स्थानों पर भेजी गई।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेकबुक और बैंक पासबुक सहित अन्य संदिग्ध सामान जब्त किया है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क से दूसरे राज्यों के साइबर अपराधी और अन्य लोग भी जुड़े हो सकते हैं। उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या बैंक से जुड़े दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। ऐसे मामलों में खाताधारक भी गंभीर कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

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