फर्जी वेबसाइट, आकर्षक छूट और मुफ्त उपहार के नाम पर बिछाया जा रहा ठगी का जाल, अनजान लिंक से रहें सावधान; ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत
दिवाली खुशियों, रोशनी और खरीदारी का त्योहार है। इस दौरान बाजारों में खरीदारी के साथ-साथ ऑनलाइन खरीदारी का चलन भी तेजी से बढ़ जाता है। ऑनलाइन खरीदारी मंचों पर मिलने वाली आकर्षक छूट, नकद वापसी और विशेष पेशकश का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। लेकिन त्योहारों के इस माहौल में साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। वे लोगों की खरीदारी की जल्दबाजी और आकर्षक छूट पाने की इच्छा का फायदा उठाकर ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं। थोड़ी सी लापरवाही से लोगों की मेहनत की कमाई पलभर में उनके बैंक खाते से निकल सकती है।
त्योहारों के मौसम में साइबर अपराधी ठगी के लिए कई तरीके अपनाते हैं। इनमें सबसे आम तरीका नामी ऑनलाइन खरीदारी वेबसाइटों जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट तैयार करना है। ये वेबसाइटें देखने में असली जैसी लगती हैं, लेकिन इनके इंटरनेट पते में एक-दो अक्षरों का अंतर होता है। जल्दबाजी में लोग इस अंतर को पहचान नहीं पाते और अपनी निजी तथा बैंकिंग जानकारी साझा कर देते हैं।
इसी तरह व्हाट्सऐप और सामाजिक माध्यमों पर दिवाली की विशेष छूट, मुफ्त उपहार, महंगा मोबाइल फोन या सोने का सिक्का जीतने जैसे संदेश भेजे जाते हैं। इन संदेशों के साथ संदिग्ध लिंक भी दिए जाते हैं। कई बार इन पर क्लिक करने से मोबाइल में हानिकारक सॉफ्टवेयर पहुंच सकता है या निजी जानकारी चोरी होने का खतरा पैदा हो सकता है।
साइबर ठग नकली ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर भी लोगों को निशाना बनाते हैं। वे फोन करके कहते हैं कि आपका सामान भेजने का आदेश रद्द हो गया है, पार्सल रोक दिया गया है या धनवापसी के लिए एक विशेष प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद वे लोगों से मोबाइल में स्क्रीन साझा करने वाले अनुप्रयोग डाउनलोड करवाते हैं। ऐसा करने पर मोबाइल की गतिविधियों और निजी जानकारी तक उनकी पहुंच हो सकती है।
कई बार महंगे मोबाइल फोन, लैपटॉप और नामी कंपनियों के कपड़ों को बेहद कम कीमत पर देने का लालच दिया जाता है। ऐसी वेबसाइटों पर केवल पहले से भुगतान करने का विकल्प दिया जाता है। भुगतान करने के बाद न तो सामान मिलता है और न ही वेबसाइट या विक्रेता से संपर्क हो पाता है।
ऑनलाइन ठगी में केवल पैसे का नुकसान ही नहीं होता, बल्कि बैंक खाते की जानकारी, क्रेडिट और डेबिट कार्ड नंबर, व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी तथा अन्य गोपनीय विवरण भी अपराधियों के हाथ लग सकते हैं। इन जानकारियों का दुरुपयोग आगे आर्थिक धोखाधड़ी और दूसरे अपराधों में किया जा सकता है।
साइबर ठगी से बचने के लिए सबसे पहले किसी भी वेबसाइट से खरीदारी करने से पहले उसके इंटरनेट पते की अच्छी तरह जांच करें। केवल वेबसाइट पर ताला या सुरक्षित कनेक्शन का संकेत देखकर उसे पूरी तरह भरोसेमंद न मानें, बल्कि उसका सही पता और आधिकारिक स्रोत भी जांचें। अनजान नंबरों से आने वाले संदेशों और सामाजिक माध्यमों पर साझा किए गए मुफ्त उपहार या असामान्य छूट वाले लिंक पर क्लिक न करें।
बैंक खाते का एकमुश्त पासवर्ड, यूपीआई पिन, कार्ड का गोपनीय सुरक्षा अंक और अन्य बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। बैंक या ऑनलाइन खरीदारी कंपनियां फोन पर आपसे ये गोपनीय जानकारियां नहीं मांगतीं। किसी नई या अनजान वेबसाइट से खरीदारी करते समय संभव हो तो सामान मिलने पर भुगतान करने का विकल्प चुनें। खरीदारी के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक अनुप्रयोग का ही इस्तेमाल करें, जिन्हें अधिकृत अनुप्रयोग भंडार से डाउनलोड किया गया हो।
यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन आर्थिक धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे बिना देर किए अपने बैंक से संपर्क कर संबंधित खाते या कार्ड को सुरक्षित करवाना चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। भारत सरकार के आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है।
दिवाली की खुशियों के बीच थोड़ी सी सावधानी बड़ी आर्थिक परेशानी से बचा सकती है। आकर्षक छूट और मुफ्त उपहार के लालच में जल्दबाजी करने के बजाय वेबसाइट और भुगतान की विश्वसनीयता की जांच करें। सतर्कता और जागरूकता के साथ ही सुरक्षित ऑनलाइन खरीदारी और त्योहार का आनंद लिया जा सकता है।

