लाखणी के कंप्यूटर सेंटर पर चल रहा था नकली आरसी बुक, अंकतालिका और प्राथमिक उपचार प्रमाणपत्र बनाने का धंधा; पुलिस ने 1.20 लाख रुपए का सामान जब्त किया
बनासकांठा। जिले के लाखणी क्षेत्र में वाव-थराद स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) पुलिस ने छापेमारी कर फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाने के एक गिरोह का खुलासा किया है। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध कारोबार को दसवीं कक्षा में अनुत्तीर्ण चार नाबालिग ऑनलाइन माध्यम और कंप्यूटर तकनीक की मदद से चला रहे थे। पुलिस ने कंप्यूटर सेंटर से करीब 1.20 लाख रुपए का सामान जब्त कर लाखणी थाने में मामला दर्ज किया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि कंप्यूटर सेंटर पर ऑनलाइन लिंक और आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर अलग-अलग प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। इनमें वाहनों की नकली पंजीकरण पुस्तिका (आरसी बुक), बिहार के पटना बोर्ड की दसवीं कक्षा की फर्जी अंकतालिकाएं और सरकारी भर्ती में उपयोग होने वाले प्राथमिक उपचार के प्रमाणपत्र शामिल थे।
आरोप है कि गिरोह की ओर से राज्य परिवहन निगम में परिचालक पद की भर्ती के लिए जरूरी सेंट जॉन एम्बुलेंस, वेरावल के नाम से फर्जी प्राथमिक उपचार प्रमाणपत्र भी तैयार कर बेचे जा रहे थे। इस तरह के दस्तावेजों के जरिए सरकारी प्रक्रियाओं और भर्ती व्यवस्था में धोखाधड़ी की आशंका जताई जा रही है।
पूछताछ में दस्तावेजों के लिए अलग-अलग दर वसूलने की बात सामने आई है। फर्जी आरसी बुक बनाने के लिए 200 से 1,000 रुपए, दसवीं की अंकतालिका के लिए 15 हजार रुपए तक और प्राथमिक उपचार प्रमाणपत्र के लिए 2,500 रुपए तक लिए जाते थे।
सूचना के आधार पर एलसीबी की टीम ने कंप्यूटर सेंटर पर अचानक दबिश दी। कार्रवाई के दौरान कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरणों सहित करीब 1.20 लाख रुपए का सामान जब्त किया गया।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में केवल चार नाबालिग ही शामिल थे या उनके पीछे कोई अन्य व्यक्ति, एजेंट अथवा बड़ा गिरोह भी सक्रिय था। फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को ठगने और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी है।

