अहमदाबाद शहर में ड्रग डीलर अब जुर्म करने के लिए बहुत चालाक और मॉडर्न तरीके अपनाने लगे हैं। आम लोगों को घर बैठे सामान भेजने की सुविधा देने वाले ऑनलाइन लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सर्विस ऐप्स अब ड्रग माफियाओं के लिए ड्रग्स की तस्करी का अड्डा बन रहे हैं। पोर्टर ऐप का गलत इस्तेमाल करके चुपके से नारकोटिक्स सप्लाई करने का एक बहुत ही चौंकाने वाला तरीका सामने आया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस फोर्स में काफी हलचल मची हुई है। 19 अक्टूबर को नाना चिलोडा सर्कल से हंसोल से गोटा भेजे जा रहे आम दिखने वाले ईयरबड्स के एक बॉक्स से जानलेवा 0.77 ग्राम मेफेड्रोन यानी MD ड्रग्स ज़ब्त किया गया।
इस पूरे खुलासे के पीछे एक व्यापारी की सतर्कता सबसे बड़ी वजह बन रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, भेजे जा रहे पार्सल के प्रोसेस और संदिग्ध मूवमेंट की वजह से असली व्यापारी को खुद शक हो गया था। अगर व्यापारी ने टाइम इंडिकेटर का इस्तेमाल करके इस मामले को तुरंत गंभीरता से नहीं लिया होता, तो यह ज़हरीला पदार्थ बिना किसी चेकिंग के सीधे अपनी मंज़िल पर पहुँच जाता। व्यापारी की समय पर सतर्कता की वजह से ही यह बड़ा रैकेट समय रहते पकड़ा गया और ड्रग माफिया के नापाक इरादों को नाकाम कर दिया गया।
जैसे ही यह गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया, नरोडा पुलिस स्टेशन ने तुरंत कार्रवाई की। पुलिस ने इस मामले में तीन अज्ञात मोबाइल फोन होल्डर्स के खिलाफ केस दर्ज कर कानूनी जांच शुरू कर दी है। टेक्निकल सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर पुलिस ने एक मुख्य आरोपी को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है, जबकि पुलिस टीमें इस काले धंधे से जुड़े दूसरे लोगों और मास्टरमाइंड्स को पकड़ने के लिए जुट गई हैं।
इस घटना से सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स पर भेजे जाने वाले पार्सल की सुरक्षा और चेकिंग का कोई पक्का सिस्टम है या नहीं? अगर ड्रग्स और गैर-कानूनी चीज़ों की तस्करी के लिए इस तरह से डिलीवरी ऐप्स का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह शहर के युवाओं के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। फिलहाल, नरोदा पुलिस इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए गहरी जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।

