शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा कि सत्ता में आते ही उन्होंने एलके आडवाणी जी को किनारे कर दिया। उन्होंने उन्हें एक तरह से ‘स्टोरेज’ में डाल दिया, एक ‘डंपिंग ग्राउंड’ में धकेल दिया और पूरी तरह से हाशिए पर ला खड़ा किया। यह BJP के इरादों और उनके चरित्र को दर्शाता है।
मुंबई : शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें किनारे कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी दिल्ली की सत्ता तक आडवाणी के रथ पर सवार होकर पहुंची है। संजय राउत ने आरोप लगाया कि भाजपा उन नेताओं को भूल गई है जिन्होंने पार्टी की नींव रखी और उसे शिखर तक पहुंचाया।
संजय राउत ने कहा कि सत्ता में आने के बाद मोदी और शाह ने आडवाणी को हाशिए पर धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत कुछ बयां करता है कि भाजपा एक तरह से अपने ही नेताओं को भूल गई है। या यूं कहें कि पूरी भाजपा नहीं, बल्कि मोदी और शाह जैसे कुछ लोगों ने उन नेताओं को भुला दिया है, जिन्होंने पार्टी की स्थापना की और उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
लालकृष्ण आडवाणी ने ही किया राम मंदिर आंदोलन
राम मंदिर आंदोलन में आडवाणी की भूमिका का जिक्र करते हुए, शिवसेना (UBT) नेता ने कहा कि अयोध्या रथ यात्रा और कार सेवा आंदोलन शुरू करने में भाजपा के इस वरिष्ठ नेता की अहम भूमिका थी। उन्होंने कहा कि अगर आडवाणी न होते, तो राम मंदिर आंदोलन भी न होता! लाल कृष्ण आडवाणी के बिना राम मंदिर आंदोलन कभी नहीं हो पाता। न तो अयोध्या रथ यात्रा होती और न ही अयोध्या में कोई कार सेवा आंदोलन होता।
‘मोदी आडवाणी की दी सत्ता का ले रहे आनंद’
संजय राउत ने आगे कहा कि राम मंदिर आंदोलन के जरिए भाजपा के राजनीतिक उत्थान का सबसे बड़ा श्रेय आडवाणी को ही जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए भगवान राम के नाम का इस्तेमाल करके सत्ता तक पहुंचने का जो रास्ता बना, उसका सबसे बड़ा श्रेय आडवाणी साहब को जाता है। आज मोदी जी जिस सत्ता का आनंद ले रहे हैं, उसके लिए उन्हें आडवाणी साहब को श्रेय देना चाहिए।
‘सत्ता में आते ही आडवाणी को कबड़ाखाने में फेंका’
सत्ता में आने के बाद भाजपा नेतृत्व द्वारा आडवाणी को किनारे किए जाने का आरोप लगाते हुए संजय राउत ने कहा, ‘सत्ता मिलते ही उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी को किनारे कर दिया। उन्होंने उन्हें एक तरह से ‘गोदाम’ में डाल दिया, जैसे किसी कबाड़खाने में फेंक दिया हो। इससे भाजपा के असली इरादों और चरित्र का पता चलता है।’ उन्होंने आडवाणी के साथ अपने जुड़ाव को भी याद किया और बताया कि इस वरिष्ठ नेता के शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ कितने करीबी संबंध थे।
‘ठाकरे परिवार और आडवाणी के रिश्ते थे करीबी’
संजय राउत ने कहा कि आडवाणी साहब ने राजनीति में 100 साल बिताए हैं। हम जैसे लोगों ने आडवाणी साहब के साथ काम किया है। हमें हमेशा उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिला है। हमने सरकार और विपक्ष, दोनों ही समय उनके साथ काम किया है। उन्होंने बताया कि बालासाहेब ठाकरे के साथ आडवाणी के बहुत अच्छे संबंध थे और वे अक्सर उनसे राजनीतिक फैसलों पर चर्चा और सलाह-मशविरा करने के लिए मिलते थे। संजय राउत ने आगे कहा कि उद्धव ठाकरे के भी आडवाणी के साथ करीबी रिश्ते थे और वे उनसे मिलने दिल्ली उनके आवास पर जाते थे, जहां वे साथ बैठकर लंच और डिनर करते थे।
‘राम मंदिर आंदोलन आडवाणी का ही दिया’
आडवाणी की लंबी चुप्पी को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए राउत ने कहा कि इस वरिष्ठ नेता ने पिछले 12 सालों में काफी मानसिक पीड़ा झेली है।उन्होंने कहा कि बीजेपी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने में बालासाहेब ठाकरे और एलके आडवाणी ने अहम भूमिका निभाई थी। राम मंदिर आंदोलन एक बहुत बड़ा अभियान था। आडवाणी ने अपनी ‘रथ यात्रा’ के जरिए इस आंदोलन को आगे बढ़ाया।
राम मंदिर आंदोलन में योगदान देने के बावजूद, बीजेपी के मौजूदा नेतृत्व के कार्यकाल में आडवाणी को दरकिनार कर दिया गया। मोदी, शाह और फडणवीस के दौर में, बीजेपी ने आडवाणी को- जिन्होंने खुद इस पार्टी को खड़ा किया था- 12 साल के वनवास में धकेल दिया है। संजय राउत
अयोध्या के राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का जिक्र करते हुए राउत ने कहा कि जिस नेता ने इस आंदोलन को पहचान और कद दिया, उसे ही इससे बाहर रखा गया। उन्होंने कहा कि जब राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तब आडवाणी- जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन को उसका कद और पहचान दी थी – को एक तरह से वनवास में छोड़ दिया गया। आडवाणी एक ‘लौह पुरुष’ थे। वे ऐसे नेता नहीं थे जो इन लोगों के इशारों पर नाचें।
‘पीएम मोदी सबसे पहले मांगे माफी’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर में पूजा करने से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को माफी मांगनी चाहिए। इसके जवाब में संजय राउत ने कहा कि सबसे पहले मोदी जी को माफी मांगनी चाहिए। अगर आपने कभी मुलायम सिंह यादव पर कार सेवकों पर गोली चलवाने का आरोप लगाया था, तो अब आप उसी मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण से कैसे सम्मानित कर सकते हैं? अखिलेश यादव उसी नेता के बेटे हैं, जिन्हें आपने पद्म विभूषण से सम्मानित करने के लिए चुना है।
राउत ने कहा कि भगवान राम सबके हैं और उन्हें किसी एक राजनीतिक दल से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने उन पोस्टरों की भी आलोचना की, जिनमें मोदी को भगवान राम की उंगली पकड़कर मंदिर ले जाते हुए दिखाया गया है। उन्होंने इसे भगवान राम का अपमान बताया।

