देश का सबसे मॉडर्न माना जाने वाला और हाई-स्पीड ड्राइविंग के लिए मशहूर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हादसों और खून-खराबे का सिलसिला थम नहीं रहा है। हाईवे पर लापरवाही और प्रशासन की बेपरवाही की वजह से एक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। वडोदरा जिले में पादरा के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर पूरी स्पीड से दौड़ रही एक इलेक्ट्रिक कार सीधे एक भारी ट्रक के पिछले हिस्से से टकरा गई जो दो दिन से हाईवे पर खड़ा था और लावारिस हालत में था। यह भयानक टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए और हादसे में एक मासूम बच्चे और एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
मिली जानकारी के मुताबिक, इस भयानक हादसे के समय विंडसर इलेक्ट्रिक कार में छोटे बच्चों समेत कुल 6 से 7 लोग सवार थे। जब यह कार, जिसमें एक परिवार सवार था, पादरा से गुज़र रही थी, तो यह मुसीबत इसलिए आई क्योंकि दो दिनों से हाईवे के बीच या किनारे खतरनाक तरीके से खड़ा ट्रक दिखाई नहीं दे रहा था। हादसा इतना भयानक था कि कार में बैठे लोगों की चीख-पुकार से हाईवे का माहौल गमगीन हो गया। सड़क पर फैली खून से सनी चीज़ें और परिवार के संघर्ष के मंज़र देखकर पैदल चलने वाले भी सिहर उठे। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि करोड़ों रुपये का टोल टैक्स वसूलने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर पिछले दो दिनों से एक भारी ट्रक लावारिस क्यों खड़ा था? क्या हाईवे अथॉरिटी और पेट्रोलिंग टीमें सो रही थीं? अगर समय रहते इस फंसे हुए ट्रक को हाईवे से हटा दिया जाता, तो शायद इन मासूम लोगों की जान बच जाती। हाईवे पर अक्सर होने वाले ऐसे जानलेवा हादसों के लिए कौन ज़िम्मेदार है? बड़ा सवाल यह है कि ट्रैफिक पुलिस और हाईवे मैनेजमेंट लोगों की जान खतरे में डालने वाली इस लापरवाही पर कब शिकंजा कसेगा। जैसे ही लोकल पुलिस और एक्सप्रेसवे रेस्क्यू टीम को इस भयानक हादसे की जानकारी मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंचे। बाकी घायलों को तुरंत इलाज के लिए पास के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने मरने वालों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और इस मामले में केस दर्ज करके आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है।
हाईवे पर हो रहे बेकाबू हादसों और प्रशासन की बड़ी लापरवाही के सामने ‘पक्को गुजरात’ का सवाल यह है कि लोगों की कीमत पर चल रहा यह सिस्टम कब सुधरेगा?

