गुना में रविवार शाम अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। कृषि उपज मंडी में खुले में रखी मक्का पानी के तेज बहाव में नालियों में बह गई, जिससे व्यापारियों को लाखों का नुकसान हुआ है। वहीं, खेतों में कटी पड़ी फसल के भीगने से फंगस का खतरा मंडरा रहा है और नवरात्र के पंडाल भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
गुना में बेमौसम मूसलाधार बारिश का कहर(फोटो- Lipi)
गुना: जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने अन्नदाताओं से लेकर उत्सव मना रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रविवार शाम शहर और आसपास के अंचल में हुई अचानक मूसलाधार बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। आधे घंटे से अधिक समय तक गिरे पानी से मुख्य सड़कें जलमग्न हो गईं, वहीं इस बेमौसम बरसात ने खेतों से लेकर कृषि उपज मंडी तक भारी तबाही मचाई है।
मंडी में बह गई मक्का, व्यापारियों को लाखों का फटका
मौसम की मार का सबसे भीषण असर गुना कृषि उपज मंडी में देखने को मिला। पिछले कुछ दिनों में व्यापारियों द्वारा खरीदी गई मक्का को सुखाने के लिए मंडी परिसर में खुले में ढेर लगाकर रखा गया था। शाम को अचानक हुई झमाझम बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव से हजारों क्विंटल मक्का बहकर सीधे नालियों में जा पहुंची। स्थिति इतनी खराब थी कि देर रात तक व्यापारी और उनके मुनीम नालियों से भीगी हुई मक्का को समेटते नजर आए। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस अचानक आई आफत के कारण व्यापारियों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
खेतों में कटी फसल पर फंगस का मंडराया खतरा
दूसरी तरफ, ग्रामीण अंचल में खेतों में कटी पड़ी मक्का की फसल भी पानी में डूब गई है। कंबाइन हारवेस्टर से निकाली गई मक्का में पहले से नमी अधिक होती है, और ऐसे में बारिश होने से दानों में सड़न पैदा होने तथा फंगस तेजी से फैलने का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, भीगने के कारण मक्का की गुणवत्ता प्रभावित होगी, जिससे न केवल उसके दाम गिरेंगे बल्कि वह उपयोग के योग्य भी नहीं बचेगी। कम कीमत मिलने की आशंका से किसान गहरी चिंता में डूब गए हैं।
नवरात्र आयोजनों में मची अफरा-तफरी
अचानक हुई इस बारिश ने शहर में चल रहे नवरात्रि महापर्व के उल्लास को भी प्रभावित किया। शाम के वक्त तेज पानी के चलते शहरभर में सजी नवरात्र झांकी समितियों के संचालकों में अफरा-तफरी मच गई। कैंट क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के बाद झांकी का पंडाल क्षतिग्रस्त हो गया। बारिश के पानी से माता की प्रतिमाओं और पंडालों को बचाने के लिए कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं को भारी मशक्कत करनी पड़ी। बिजली और तेज हवाओं के बीच व्यवस्थाएं संभालने में आयोजकों को काफी संघर्ष करना पड़ा।
प्रशासन के सर्वे का इंतजार
बहरहाल, इस बेमौसम आपदा से हुए कुल नुकसान का सटीक आकलन प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा आधिकारिक सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल किसान और व्यापारी हुए नुकसान की भरपाई को लेकर चिंतित हैं।

