ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पशुधन विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव योगेश कुमार को गोमती नगर स्थित आवास से अरेस्ट कर लिया है।
लखनऊ: वर्ष 2014 में हुई पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती में कथित घोटाले के मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई हुई है। ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन प्रमुख सचिव (पशुधन) और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। टीम ने गोमती नगर स्थित उनके आवास से पकड़ा। इस मामले में जांच एजेंसी पहले ही 25 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। तत्कालीन पशुधन मंत्री राज किशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की फाइल शासन स्तर पर लंबित है।
यह भर्ती सपा सरकार के कार्यकाल में 1198 पशुधन प्रसार अधिकारियों के पदों के लिए कराई गई थी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1005 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण देकर नियुक्तियां भी दे दी गई थीं। बाद में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे और 34 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और वर्ष 2017 में इसे एसआईटी को सौंप दिया गया।
जनवरी 2019 में दर्ज हुई थी एफआईआर
एसआईटी जांच के आधार पर तीन जनवरी 2019 को तत्कालीन पशुधन विभाग के निदेशक डॉ. रुद्र प्रताप सिंह, संयुक्त निदेशक डॉ. पीके त्रिपाठी, अपर निदेशक (फैजाबाद मंडल) डॉ. जीएन सिंह, डॉ. चरण सिंह, अपर निदेशक (गोरखपुर मंडल) डॉ. कृष्ण प्रताप तथा फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, रायबरेली के सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर मोहम्मद इशरत समेत अन्य के खिलाफ अमानत में खयानत, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और साक्ष्य मिटाने के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि विभागीय अधिकारियों और संस्थान से जुड़े लोगों ने मिलीभगत कर भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर की और अयोग्य अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया।
ईओडब्ल्यू की जांच में अब तक 28 लोगों की भूमिका सामने आ चुकी है। इनमें से 25 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। जांच एजेंसी का कहना है कि भर्ती परीक्षा दो फरवरी 2014 को आयोजित होने के बाद ओएमआर शीटों के मूल्यांकन और अंतिम चयन प्रक्रिया में नियमों के विपरीत व्यापक अनियमितताएं की गईं।
नियमों का रख दिया गया ताक पर
जांच में पाया गया कि भर्ती नियमावली के तहत अंतिम चयन की जिम्मेदारी मंडलीय चयन समितियों को सौंपी गई थी, लेकिन उन्हें दरकिनार कर पूरी प्रक्रिया का केंद्रीकृत संचालन किया गया। ओएमआर शीटों के मूल्यांकन का कोई पूर्व अनुभव न होने के बावजूद रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी को यह कार्य सौंपा गया। बाद में बैकडेट में अनुबंध कर ओएमआर शीटों का केंद्रीकृत मूल्यांकन कराया गया और मेरिट सूची तैयार की गई।

