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जन्म की तारीख ही बनी विदाई का दिन: 75वें जन्मदिन के जश्न के बीच, 450 अपनों की मौजूदगी में थम गईं अरुणजी भंडारी की सांसें

कजगांव (भड़गांव) : जिंदगी और मौत के बीच का सफर कब, कैसे और किस मोड़ पर थम जाए, यह कोई नहीं जानता। कुदरत के फैसले कभी-कभी इतने अचरज भरे और मार्मिक होते हैं कि इंसान केवल हैरान रह जाता है। महाराष्ट्र के कजगांव (भड़गांव) में एक ऐसी ही अत्यंत दुर्लभ, मार्मिक और झकझोर देने वाली घटना घटी है, जिसने पूरे इलाके और भंडारी परिवार को गहरे सदमे और आंसुओं में डुबो दिया है।

शांत स्वभाव, मिलनसार और गहरी धार्मिक प्रवृत्ति के धनी श्री अरुणजी बिरदमलजी भंडारी (उम्र 75 वर्ष) की 11 अक्टूबर 2026 को उनके ही जन्मदिन के दिन अचानक मृत्यु हो गई। सबसे हैरान करने वाली और अलौकिक बात यह रही कि जिस तारीख को उन्होंने दुनिया में जन्म लिया था, ठीक उसी तारीख पर उनका निधन हुआ—जन्म और मृत्यु की यह एक जैसी तारीख इतिहास में शायद ही कभी देखने को मिलती है।

खुशियों से सराबोर था माहौल, 450 प्रियजन थे मौजूद

घटना बीती 11 अक्टूबर 2026 की शाम की है। श्री अरुणजी भंडारी का 75वां जन्मदिन मनाने के लिए परिवार ने एक भव्य और हर्षोल्लास से भरा कार्यक्रम आयोजित किया था। इस विशेष अवसर पर भंडारी परिवार का कोना-कोना खुशियों से गूंज रहा था। कार्यक्रम में उनके भाई श्री अभयजी व श्री किशोरजी, बहन श्रीमती मंगला बहन, उनके सभी बेटे, बेटियां, पोते-पोतियां, दूर-दराज से आए रिश्तेदार और कई घनिष्ठ मित्र—कुल मिलाकर लगभग 450 प्यारे लोग मौजूद थे।
शाम ठीक 7 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पूरा हॉल बधाइयों, तालियों और शुभकामनाओं के शोर से गुलजार था। हर किसी के चेहरे पर अरुणजी की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की दुआएं थीं।

बेटी के स्नेहिल शब्दों के बाद आया वह अनचाहा पल

समारोह के दौरान माहौल बेहद भावनात्मक और आनंदमय था। इस दौरान उनकी बेटी स्वीटी ओस्तवाल ने अपने परिवार की ओर से माइक संभालते हुए अपने पिता के जीवन, उनके संस्कारों और उनके प्रति पूरे परिवार के अगाध प्रेम को बयां करते हुए दो प्यारे शब्द कहे और उन्हें जन्मदिन की आत्मीय शुभकामनाएं दीं।

बेटी के इन शुभकामनाओं भरे शब्दों के बाद अब बारी थी केक काटकर इस 75वें जन्मदिन के जश्न को अमर बनाने की। श्री अरुणजी अपनी जीवनसंगिनी
(धर्मपत्नी), अपने बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ हॉल में मौजूद सभी रिश्तेदारों के सामने केक काटने के लिए आगे बढ़े। चेहरे पर हल्की सी
मुस्कान और अपनों का घिरा हुआ परिवार—सब कुछ कितना सुंदर लग रहा था।

किंतु, कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। यह मानो साक्षात ईश्वर का बुलावा था… केक कटने से ठीक पहले, महज कुछ ही पलों के अंतराल में, अरुणजी की ज़िंदगी सबके सामने शांत हो गई। उनकी सांसें थम गईं और एक पल पहले तक जो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था, वह अचानक एक गहरी और भारी खामोशी में डूब गया। जश्न का वह खूबसूरत माहौल देखते ही देखते शोक और आंसुओं में बदल गया।

एक दुर्लभ संयोग: जन्म और मरण का एक ही दिन

ज्योतिषीय और व्यावहारिक रूप से देखें तो ऐसा संयोग सदियों में किसी विरले के साथ ही होता है। जिस पावन दिन (11 अक्टूबर) को अरुणजी ने इस संसार में पहली बार आंखें खोली थीं, ठीक 75 वर्ष पश्चात उसी तारीख और दिन पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। अपनों के बीच, अपने परिवार की छांव में इस तरह विदा होना जहां एक ओर उनके पुण्यात्मा होने का प्रमाण है, वहीं दूसरी ओर परिवार के लिए यह कभी न भरने वाला घाव बन गया है।
धार्मिक और सादगीपूर्ण जीवन के प्रतीक थे अरुणजी

दिवंगत अरुणजी भंडारी अपने जीवनकाल में हमेशा एक आदर्श इंसान रहे। उनका पूरा जीवन सादगी, शांत स्वभाव, दूसरों की मदद करने और धार्मिक अनुष्ठानों व पूजा-पाठ में बीता। वे परिवार के स्तंभ और समाज के एक सम्मानित व्यक्ति थे। उनके इस प्रकार अचानक असमय चले जाने से कजगांव और भड़गांव क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

कार्यक्रम में मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं और हर जुबान पर बस यही प्रार्थना थी—

“हे ईश्वर, इस पुण्यात्मा अरुणजी भंडारी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उन्हें मोक्ष प्रदान करें। साथ ही, इस दुख की घड़ी में पूरे भंडारी परिवार को यह अपार सहनशक्ति दें।”

‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ परिवार की ओर से दिवंगत श्री अरुणजी बिरदमलजी भंडारी को शत-शत नमन और विनम्र श्रद्धांजलि!

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