यूपी में पूजा के नाम पर बिकने वाले ‘घी’ पर रोक लगा दी गई है। एफएसडीए आयुक्त ने ‘पूजा घी’ के नाम से किसी भी उत्पाद के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने को लेकर निर्देश जारी किया।
लखनऊ: पूजा, हवन और दीपक के लिए तैयार किए जाने वाले अखाद्य वसा उत्पादों को खाद्य घी के रूप में बाजार में बेचे जाने पर रोक लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) आयुक्त ने प्रदेश के सभी खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण धारकों के लिए तत्काल प्रभाव से निर्देश जारी करते हुए ‘पूजा घी’ के नाम से किसी भी उत्पाद के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद मनमानी करने वालों का स्टॉक जब्त करने के साथ ही निर्माण इकाई का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया जाएगा।
जानिए एफएसडीए आयुक्त ने क्या कहा
एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि कुछ खाद्य विनिर्माण इकाइयों की ओर से वनस्पति, रिफाइंड तेल, एसेन्स, पैराफिन, मिनरल ऑयल और अन्य रासायनिक पदार्थों के साथ वसा का इस्तेमाल कर पूजा, हवन और दीपक आदि के लिए उत्पाद तैयार किया जा रहा है। ऐसे उत्पादों का स्वरूप, रंग, गंध, पैकेजिंग और प्रस्तुति बाजार में उपलब्ध खाद्य घी के समान होने के कारण उपभोक्ता भ्रमवश इसे खाने पीने में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसीलिए ऐसे उत्पाद के निर्माण व बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इससे खाद्य और अखाद्य उत्पादों के मिश्रण, मिलावट, गलत लेबलिंग और गैर-खाद्य उत्पादों के खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पैकेट पर ‘घी’ लिखना भी प्रतिबंधित
खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित विनियमों में खाद्य घी यानी मिल्क फैट का मानक निर्धारित है। ऐसे में पूजन या हवन के लिए तैयार अखाद्य उत्पाद के पैकेट पर ‘घी’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा और न ही उसे ‘पूजा के लिए घी’ के रूप में प्रचारित किया जाएगा। ऐसे उत्पादों की पैकेजिंग पर निर्धारित चिह्न भी लगाना होगा। पूजन के लिए तैयार अखाद्य वसा उत्पादों के रिटेल पैक पर एक वर्ग के भीतर काले रंग का क्रॉस निर्धारित आकार में अंकित करना होगा।
खाद्य और पूजन उत्पादों की ब्रैडिंग भी होगी अलग
खाद्य घी और पूजन में इस्तेमाल होने वाली अखाद्य वसा से बने उत्पादों को एक ही ब्रैड नाम (को-ब्रांडिंग) के तहत निर्मित नहीं किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य खाद्य और गैर-खाद्य उत्पादों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना है, ताकि बाजार में किसी प्रकार का भ्रम पैदा न हो और अखाद्य उत्पाद खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा न बनें।

