दतिया में अकबर के जमाने के चार चांदी के सिक्के जमीन में दबे मिले हैं। इसके बाद परिवार ने इसे कलेक्टर ऑफिस में जमा करा दिया है। सिक्कों पर इलाही महीनों का जिक्र है। इन सिक्कों को स्कैन कर पुरातत्व विभाग की वेबासाइट पर अपलोड किया जाएगा।
हाइलाइट्स
दतिया में अकबर के जमाने के चांदी के सिक्के मिले
निर्माण के दौरान जमीन के अंदर दबे मिले हैं ये सिक्के
परिवार ने कलेक्टर ऑफिस में जमा कराए चांदी के चारों सिक्के
सिक्कों पर इलाही युग और टकसाल के नाम हैं दर्ज
मध्य प्रदेश के दतिया जिले स्थित एक खेत में दबे हुए चांदी के चार सिक्के मिले हैं। ये सिक्के अकबर के दौर के हैं। सिक्कों पर उनके कम समय तक चले इलाही प्रयोग की साफ छाप है। ये सिक्के भरतगढ़ इलाके के रहने वाले प्रीतम रजक के परिवार को उनकी जमीन पर निर्माण कार्य के दौरान मिले हैं।
स्थानीय विधायक के पास ले गए सिक्के
परिवार इन सिक्कों को लेकर दतिया विधायक और शाही परिवार के सदस्य घनश्याम सिंह के पास पहुंचा। उन्होंने कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े को बुलाया। दतिया कलेक्टर ने कहा कि घनश्याम जी का मुझे फोन आया था। मैंने उनसे कहा कि वे सिक्के और उन्हें पाने वाले व्यक्ति को मेरे पास भेज दें।
बुधवार शाम को उन्होंने कलेक्टर ऑफिस में सिक्के जमा करा दिए। शुरुआती जांच से पता चला है कि ये चांदी के पुराने सिक्के हैं। स्वप्निल खेड़े, दतिया कलेक्टर
पुरातत्वविदों ने की सिक्के की पहचान
वहीं, पुरातत्वविद् और इतिहासकार वसीम खान ने चारों सिक्कों की जांच की और उनकी पुष्टि की है। उन्होंने सिक्कों पर लिखी बातों, इलाही महीनों और टकसालों की पहचान की है।
सिक्कों पर एक तरफ अल्लाह हू अकबर, जल्ला जलालुहू लिखा है, जबकि दूसरी तरफ इलाही महीने और टकसाल का नाम है। आजर इलाही अहमदाबाद, अमरदाद इलाही आगरा, बहमन इलाही अहमदाबाद और तीर इलाही लाहौर। वसीम खान, इतिहासकार
सिक्कों पर अकबर के समय की झलक
ये लिखावटें अकबर की एक नई शाही शब्दावली बनाने की कोशिश की झलक दिखती है। 1582 में शुरू किया गया उनका दीन ए इलाही एक बहुत ही सीमित अध्यात्मिक पंथ था, जबकि इससे जुड़ा इलाही कैलेंडर फारसी नामों वाले सौर महीनों पर आधारित था।
नई व्यवस्था को सिक्कों पर अपनाया गया
इतिहासकार वसीम खान ने कहा कि इस नई व्यवस्था को सिक्कों पर भी अपनाया गया, जिसमें पारंपरिक इस्लामी तारीखों की जगह इलाही युग की तारीखों और महीनों के नाम का इस्तेमाल किया गया है।
इन सिक्कों को स्कैन किया जाएगा और अध्ययन के लिए विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध करवाया जाएगा। मदन कुमार नागरगोजे, पुरातत्व आयुक्त
सिक्के इतिहास बताते
पुरातत्व आयुक्त ने कहा कि सिक्के किसी दौरान का इतिहास बताते हैं। उस समय की धातु विज्ञान की जानकारी और डिजाइन के बारे में बताते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डिजिटाइज किए गए सिक्के छात्रों की इंटर्नशिप और रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए सामाग्री उपलब्ध करा सकते हैं।

