दतिया में बीजेपी ने माधवेंद्र सिंह को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। मधावेंद्र सिंह को नरेंद्र सिंह तोमर का करीबी बताया जा रहा है। इससे पहले वह दतिया जिले के महामंत्री रह चुके हैं। उनकी नियुक्ति के साथ ही पार्टी ने यह संदेश दिया है कि दतिया में संगठन को मजबूत करना है।
हाइलाइट्स
दतिया में बीजेपी के नए जिलाध्यक्ष बने माधवेंद्र सिंह परिहार
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी हैं माधवेंद्र सिंह
दतिया हार के 49 दिन बाद बीजेपी ने नियुक्त किया जिलाध्यक्ष
नरोत्तम मिश्रा की छाप से दतिया में संगठन होगा अलग
मध्य प्रदेश में बीजेपी ने दतिया हार के बाद नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति कर दी है। नए जिलाध्यक्ष पर नरोत्तम मिश्रा की छाप नहीं है। माधवेंद्र सिंह परिहार को दतिया का जिला अध्यक्ष बनाया गया है। बताया जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के वह करीबी हैं।
हार के बाद पार्टी ने भंग कर दी थी जिला कमिटी
दरअसल, दतिया उपचुनाव के परिणाम तीन अगस्त को आए थे। परिणाम के बाद कथित रूप से भीतरघात के आरोप लगे थे। इसके बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दी थी। कार्यकारिणी में ज्यादातर नरोत्तम मिश्रा के चहेते लोग थे।
माधवेंद्र सिंह को बनाया गया जिलाध्यक्ष
बीजेपी ने मंगलवार की रात दतिया के लिए जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी है। पूर्व में दतिया के जिला महामंत्री रह चुके माधवेंद्र सिंह को अध्यक्ष बनाया गया है। वह बीते दो दशक से बीजेपी से जुड़े हैं। साथ ही पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। जमीनी स्तर पर भी उनकी अच्छी पकड़ है।
नरेंद्र सिंह तोमर के हैं करीबी
एक समय में ग्वालियर-चंबल इलाके में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का दबदबा रहा है। उस क्षेत्र में बीजेपी के सबसे बड़े नेता आज भी वही हैं। दतिया के नए जिलाध्यक्ष माधवेंद्र सिंह भी उनके करीबी बताए जा रहे हैं।
आशुतोष तिवारी के नाम पर नहीं बनी सहमति
वहीं, बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को भी जिलाध्यक्ष बनाने की चर्चा हुई थी। हार के बाद वह भी क्षेत्र में सक्रिय हैं लेकिन संगठन की मीटिंग में उनके नाम पर सहमति नहीं बनी। आशुतोष तिवारी की हार के बाद ही तत्कालीन जिलाध्यक्ष रघुवीर शरण कुशवाह को हटाया गया था।
नरोत्तम मिश्रा को लगाया जा रहा किनारा
गौरतलब है कि बीजेपी की कोशिश है कि दतिया में संगठन मजबूत हो। किसी व्यक्ति विशेष की छत्रछाया तले वहां संगठन काम नहीं करे। इस बात का आभास पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी है। वह लगातार अपनी धमक बरकरार रखने के लिए दतिया में सक्रिय हैं। बीते दिनों सेवा संकल्प अभियान में वह 500 गाड़ियों के काफिले के साथ नजर आए थे। साथ ही उनके मन में यह भी टीस है कि पार्टी ने मुझे टिकट मांगने के बाद भी नहीं दिया है।

