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वडोदरा की होनहार बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराया तिरंगा, जीते गोल्ड मेडल

आर्थिक मुश्किलों को मात देकर रचा इतिहास, एक खिलाड़ी के पिता ऑटो चलाकर करते हैं परिवार का पालन-पोषण, दूसरी ने कम उम्र में खो दी पिता की छत्रछाया

वडोदरा/गांधीनगर. जब हौसले बुलंद हों और आंखों में सपनों को पूरा करने की जिद हो, तो आर्थिक तंगी भी सफलता की राह नहीं रोक सकती। गुजरात के वडोदरा की दो होनहार बेटियों ने अपनी मेहनत, संघर्ष और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश और गुजरात के लिए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इन खिलाड़ियों की सफलता जितनी गौरवपूर्ण है, उनके संघर्ष की कहानी उतनी ही प्रेरणादायी है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा लहराने वाली इन दोनों खिलाड़ियों के परिवारों ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। इनमें से एक खिलाड़ी के पिता ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से बेटी के खेल और प्रशिक्षण के सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं दूसरी खिलाड़ी ने कम उम्र में ही अपने पिता को खो दिया। पिता की छत्रछाया से वंचित होने के बावजूद उसने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और पूरे हौसले के साथ अपनी खेल प्रतिभा को निखारती रही। महंगे प्रशिक्षण, खेल उपकरणों की कमी और परिवार की आर्थिक चुनौतियों के बीच इन बेटियों ने लगातार मेहनत जारी रखी। आखिरकार उनके पसीने और संघर्ष का परिणाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया। प्रतिभा होने के बावजूद आर्थिक परेशानियों के कारण देश में कई खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते और उन्हें खेल छोड़ने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे समय में वडोदरा की इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी उम्मीद सामने आई है।

इन बेटियों की प्रतिभा और संघर्ष से प्रभावित होकर कच्छ केमिकल्स लिमिटेड और के.पी. एजुकेशन ट्रस्ट के प्रमुख शिवलाल गोयल ने मदद के लिए आगे आने का निर्णय लिया है। उन्होंने खिलाड़ियों की खेल यात्रा को आर्थिक कारणों से रुकने नहीं देने का संकल्प लिया है। शिवलाल गोयल ने इन खिलाड़ियों को खेल से जुड़े भविष्य के खर्चों और आवश्यक आर्थिक सहायता के लिए लाइफटाइम सपोर्ट देने की घोषणा की है। इस सहयोग से अब इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और अन्य खेल संबंधी खर्चों की चिंता से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। संघर्ष से सफलता तक पहुंची इन बेटियों की कहानी न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादे और निरंतर मेहनत के सामने मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती हैं।

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