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राजकोट में फिर गरमाई सियासत: पद्मिनीबा वाड़ा के खिलाफ सरकारी काम में बाधा का मामला दर्ज होने से हाहाकार, रेलनगर के सांधिया पुल के बैरिकेड्स बने विवाद की जड़!

ट्रैफिक पीआई सरोजबेन की शिकायत के बाद क्षत्रिय समाज और पुलिस आमने-सामने, जनता की परेशानी के खिलाफ आवाज उठाना पड़ा भारी?
सांधिया पुल के पास रखे गए बैरिकेड्स राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बने सिरदर्द, भारी रोष व्याप्त

राजकोट : रंगछवि वाले राजकोट शहर में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। शहर के रेलनगर इलाके में आना-जाने वाले आम नागरिकों और राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बने ट्रैफिक बैरिकेड्स के विरोध में मैदान में उतरी जानी-मानी नेता पद्मिनीबा वाड़ा के खिलाफ पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रैफिक पुलिस पीआई सरोजबेन की शिकायत के आधार पर पद्मिनीबा के खिलाफ ‘सरकारी ड्यूटी में बाधा’ (Government Duty Obstruction) का मामला दर्ज किए जाने से पूरे शहर में भारी सनसनी फैल गई है।

क्या है पूरे विवाद की जड़?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजकोट के रेलनगर इलाके में स्थित सांधिया पुल (Sandhiya Pul) के पास से रोजाना हजारों की संख्या में वाहन चालक और स्थानीय लोग गुजरते हैं। इस इलाके में पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स और ट्रैफिक व्यवस्था के कारण आए दिन भारी ट्रैफिक जाम लग जाता था और राहगीरों के लिए ये बैरिकेड्स सिरदर्द साबित हो रहे थे। आम जनता की इस स्थायी परेशानी और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पद्मिनीबा वाड़ा ने इन बैरिकेड्स का खुला विरोध किया था और जनता के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई थी।

विरोध करते ही पुलिस तंत्र हरकत में, मामला दर्ज

आम जनता के दर्द और ट्रैफिक की समस्या के खिलाफ आवाज उठाना पद्मिनीबा वाड़ा को भारी पड़ गया है। विरोध प्रदर्शन बढ़ने पर प्रशासन हरकत में आया और ट्रैफिक पुलिस शाखा की पीआई सरोजबेन की आधिकारिक शिकायत के आधार पर पद्मिनीबा के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद क्षत्रिय समाज और स्थानीय नागरिकों में गहरी नाराजगी की लहर दौड़ गई है।

जनता के सवाल उठाने पर अंकुश या कानून का दुरुपयोग?

इस घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में जोरदार चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जनता के हित के लिए और ट्रैफिक की असुविधा को दूर करने के लिए ज्ञापन देने या विरोध करने गए नेता के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज होने से क्या लोकतंत्र में आवाज को दबाया जा रहा है? ऐसे गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले के और अधिक तूल पकड़ने की पूरी संभावना है।

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