गूगल, मेटा और इंटेल जैसी दिग्गज कंपनियों की हजारों हाई-स्किल्ड नौकरियां खतरे में
23 साल का अनुभव रखने वाले डेवलपर एडवोकेट श्रीराम रामकृष्णन को नौकरी गंवाने के बाद एक साल तक करना पड़ा संघर्ष
अहमदाबाद/टेक वर्ल्ड : पूरी दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों में पिछले कुछ समय से चल रही बड़े पैमाने पर छटनी (Layoffs) ने हजारों प्रतिभाशाली इंजीनियरों और प्रोडक्ट मैनेजरों का भविष्य अंधकारमय बना दिया है। गूगल (Google), मेटा (Meta), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और इंटेल (Intel) जैसी ग्लोबल जायंट कंपनियों से रातों-रात बाहर किए गए कर्मचारियों के लिए आज नई नौकरी पाना लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है। लाखों-करोड़ों का पैकेज पाने वाले टेक प्रोफेशनल्स आज बेरोजगारी के भंवर में गोता लगाने को मजबूर हैं।
23 साल का करियर और अचानक झटका!
इस कड़वी सच्चाई का शिकार हुए ऐसे ही एक हाई-प्रोफाइल मामले में, इंटेल कंपनी में ‘डेवलपर एडवोकेट’ के तौर पर काम करने वाले और सालाना $1,80,000 (लगभग 1.80 लाख डॉलर) कमाने वाले श्रीराम रामकृष्णन को जुलाई 2025 में नौकरी से निकाल दिया गया था। लगातार 23 साल तक कंपनी को अपनी निष्ठा और कुशलता देने के बाद अचानक नौकरी छूटने से उनकी व्यक्तिगत पहचान और आत्मविश्वास को हिला देने वाला बड़ा झटका लगा था।
6 महीने का अनुमान और 1 साल से ज्यादा का संघर्ष!
जब श्रीराम को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखाया गया, तब उन्होंने सोचा था कि उनके अनुभव और स्किल्स के दम पर उन्हें अधिकतम छह महीने के भीतर नई नौकरी मिल जाएगी। लेकिन, ग्लोबल टेक मार्केट की मंदी और कठोर सच्चाई यह थी कि एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई संतोषजनक नौकरी नहीं मिल सकी। छह अंकों की सालाना सैलरी गंवाने के बाद सैकड़ों या हजारों कंपनियों में आवेदन करने के बावजूद सिर्फ निराशा ही हाथ लगी, जो बिग टेक सेक्टर के कर्मचारियों के लिए एक कड़वी हकीकत बन चुकी है।
नौकरी की आस छोड़कर शुरू किया अपना ‘स्टार्टअप’!
लंबे समय तक बेरोजगार रहने और तमाम बाधाओं का सामना करने के बावजूद, श्रीराम ने हार मानने से इनकार कर दिया था। निराश होकर बैठने के बजाय उन्होंने नया रास्ता चुना और अपना खुद का स्टार्टअप ‘Technidox’ शुरू करके एक शानदार शुरुआत की है। उनका यह सफर साबित करता है कि कितनी भी बड़ी मुसीबत आ जाए, लेकिन अगर मजबूत मनोबल हो तो इंसान अपनी किस्मत खुद लिख सकता है।

