मध्य प्रदेश में बड़े अवैध पासपोर्ट रैकेट का खुलासा किया है। इस रैकेट में शामिल 100 संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। भोपाल के अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते पर 40 लोगों के पासपोर्ट बन गए हैं। मध्य प्रदेश के पते पर गए बांग्लादेशी नागरिकों के भी पासपोर्ट बने हैं।
हाइलाइट्स
मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट बनाने का रैकेट चल रहा
भोपाल के अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते पर 40 पासपोर्ट बने
बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट भी एमपी के पते पर बने
एसटीएफ की जांच में विदेश यात्रा करने की भी बात सामने आई
भोपाल: मध्य प्रदेश में एसटीएफ एक संदिग्ध पासपोर्ट रैकेट के मामले में लगभग 100 लोगों को गिरफ्तार कर सकती है। अधिकारियों के अनुसार इस रैकेट में विदेशी नागरिकों ने फर्जी पते का इस्तेमाल कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए। इसमें संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं।
जांच के दायरे में हैं 70 पासपोर्ट
इसमें लगभग 70 पासपोर्ट जांच के दायरे में हैं। जांच टीमें इनके धारकों का पता लगा रही हैं और आवेदन में इस्तेमाल किए गए पतों और पहचान की पुष्टि कर रही हैं। इनमें से ज्यादातर पासपोर्ट 2021-22 में जारी किए गए थे। अब जांच का फोकस उन पुलिसकर्मियों की कथित लापरवाही पर है जो पासपोर्ट आवेदकों के फील्ड वेरिफिकेशन के लिए जिम्मेदार थे।
कर्मचारियों की जांच की जा रही
वहीं, जांच के दायरे में नगर निगम और सरकारी कर्मी भी हैं, जिन्होंने कथित तौर पर आवेदकों की पहचान और पते साबित करने वाले दस्तावेजों को तैयार करने या प्रमाणित करने में मदद की थी।
आवसीय पते का इस्तेमाल किया
जांच कर रही टीम ने पाया कि कई आवेदकों ने पासपोर्ट हासिल करने के लिए मध्य प्रदेश के आवसीय पते दिखाने वाले दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि दस्तावेजा कैसे तैयार किए गए। आवेदनों में किसने मदद की और आवेदकों ने अनिवार्य वेरिफिकेशन कैसे पास किया।
इन पासपोर्ट्स पर विदेश यात्रा की
विदेशी नागरिकों की संलिप्तता का दायरा मध्य प्रदेश से आगे बढ़ गया है। कई पासपोर्ट होल्डर्स का पता विदेश में चला है, जबकि अन्य की यात्रा हिस्ट्री में कंबोडिया, स्पेन, थाईलैंड और इंडोनेशिया शामिल हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या पासपोर्ट सिर्फ भारतीय पहचान बनाने के लिए हासिल किए गए थे या वे कई देशों में चल रहे किसी बड़े संगठित नेटवर्क से जुड़े थे।
एमपी का पता क्यों चुना
वहीं यह भी जांच की जा रही है कि आवेदकों ने राज्य के पते क्यों चुने, उन्हें इस कथित नेटवर्क में कौन लाया और क्या बाद में पासपोर्ट का इस्तेमाल यात्रा, प्रवास या अन्य उदेश्यों के लिए किया गया है। सरकारी सिस्टम के भीतर वेरिफिकेशन चेन पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती जांच में आवेदकों के पते और पहचान की पुष्टि करने के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन में बड़ी खामियां पाई गई हैं। जांचकर्ता यह देख रहे हैं कि क्या वेरिफिकेशन ठीक से किया गया था या बिना पर्याप्त फिजिकल जांच के ही दस्तावेज स्वीकार कर लिए गए थे। मगर निगम और अन्य सरकारी कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है क्योंकि कई सहायक दस्तावेज कथित तौर पर सरकारी रिकॉर्ड या वेरिफिकेशन सिस्टम से होकर गुजरे थे।
दो संदिग्धों को पकड़ा
एसटीएफ ने नेटवर्क की जानकारी मिलने के बाद एक केस दर्ज किया था। ये लोग पासपोर्ट आवेदनों के लिए फर्जी आवसीय पते साबित करने के वास्ते जाली दस्तावेज तैयार करने और उनके इस्तेमाल करने में शामिल था। अब तक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
असम और अन्य जगहों पर जांच कर रही टीम
पासपोर्ट धारकों की पहचान और पते की पुष्टि करने और पता लगाने के लिए असम और अन्य जगहों पर टीमें भेजी गई हैं कि क्या सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज लोग वास्तव में बताई गई जगहों पर रहते थे।
अधिकारियों का कहना है कि संदिग्धों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि 70 पासपोर्ट की जांच चल रही है और जांचकर्ता उनलोगों के बड़े नेटवर्क का पता लगा रहे हैं जो दस्तावेज तैयार करने, पते का इंतजाम करने और आवेदन में मदद करने का काम करते थे।
भारत से बाहर गए लोगों की भी जांच
वहीं, जांचकर्ता उन पासपोर्ट धारकों के यात्रा रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं जो भारत से बाहर जा चुके हैं, ताकि उनकी मौजूदा लोकेशन और गतिविधियों का पता लगाया जा सके। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह रैकेट सिर्फ भारतीय पासपोर्ट हासिल करने तक ही सीमित था या यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों की आवाजाही में मदद करने वाली किसी बड़ी नेटवर्क का हिस्सा था।
अन्ना नगर के मठ के पते का हुआ इस्तेमाल
जांच में यह भी बात सामने आई है कि भोपाल के अन्ना नगर में एक मठ के पते का इस्तेमाल करके लगभग 40 लोगों को पासपोर्ट जारी किए गए थे। एसटीएफ को पता चला है कि यह संदिग्ध गिरोह कथित तौर पर उन लोगों की मदद करता था जो बांग्लादेश से भारत आए थे। जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके खुद को भारतीय नागरिक के तौर पर स्थापित करना चाहते थे।

