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…तो इसलिए नाराज हैं उज्जैन में बजरंगबली! नए मंदिर में जाते ही हो जाएंगे उत्तरमुखी

उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में विराजमान बजरंगबली को नए मंदिर में स्थापित करने की तैयारी हो चुकी है, लेकिन प्रतिमा अब तक अपनी जगह से नहीं हटी. नए मंदिर में हनुमान जी उत्तरमुखी हो जाएंगे, जबकि अभी उनका मुख दक्षिण दिशा में है. श्रद्धालुओं का कहना है कि शायद इसी वजह से बजरंगबली नाराज हैं और अपनी जगह छोड़ने को तैयार नहीं. भक्त प्रशासन से मंदिर यहीं रखने की मांग कर रहे हैं.

महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों का एक खड़े हनुमान जी के मंदिर की चर्चा देशभर में हो रही है. पिछले कुछ दिनों से लगातार यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है. मंगलवार या शनिवार ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी यहां सुबह से शाम तक लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. आजतक उस जगह पहुंचा जहां खड़े हनुमान को स्थापित करने की तैयारी है. श्रद्धालुओं ने बताया कि मौजूदा स्थान पर हनुमान जी दक्षिणमुखी हैं, जबकि टंकी चौक पर जिस नए मंदिर का ढांचा तैयार किया जा रहा है, वहां प्रतिमा की स्थापना होने पर उनका मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा. शायद यही वजह है कि हनुमान जी नाराज चल रहे हैं.

टंकी चौक पर तैयार हो चुका है मंदिर का ढांचा

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में कई सड़कों और प्रमुख मार्गों के विस्तार का काम प्रस्तावित है. इसी क्रम में कंठाल से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण की योजना है. खड़े हनुमान जी का मंदिर इसी प्रस्तावित मार्ग में आ रहा है.

प्रशासन की योजना के मुताबिक प्रतिमा को वर्तमान स्थान से हटाकर टंकी चौक के पास नए स्थान पर स्थापित किया जाना है. इसके लिए नए मंदिर का ढांचा भी तैयार कर दिया गया है. यहां तैयारियां लगभग पूरी नजर आ रही हैं. बताया जा रहा है कि जन्माष्टमी के आसपास प्रतिमा को नए मंदिर में स्थापित करने की तैयारी थी. मंदिर को फूलों से सजाया भी गया था. लेकिन जिस प्रतिमा को नई जगह ले जाने की तैयारी थी, वह अपनी जगह से हिली ही नहीं.

श्रद्धालुओं के बीच अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि नई जगह पर हनुमान जी की दिशा बदल जाएगी. मौजूदा मंदिर में प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर है. प्रस्तावित नए मंदिर में जिस तरह से स्थान और स्थापना की तैयारी है, उसके मुताबिक प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा. श्रद्धालुओं का एक वर्ग इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है. मंदिर पहुंचे लोगों का कहना है कि जब भगवान को उसी रूप और उसी दिशा में यहां पूजा जाता रहा है तो स्थान बदलने के साथ उनकी दिशा क्यों बदली जाए?

‘चमत्कारिक मंदिर’ मानते हैं श्रद्धालु

खड़े हनुमान मंदिर के स्थानीय श्रद्धालु इसे सामान्य मंदिर नहीं मानते. उनके बीच इस मंदिर को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. लोगों का कहना है कि यहां हनुमान जी की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मंदिर से मिलने वाले ताबीज और झड़नी को लेकर भी श्रद्धालुओं में अलग-अलग मान्यताएं हैं. कई लोग दावा करते हैं कि इनके इस्तेमाल से उन्हें अलग-अलग परेशानियों और बीमारियों में राहत मिली. गुरुवार को भी मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही. कोई हाथ जोड़कर खड़ा था तो कोई हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था. कई लोग मोबाइल से मंदिर की तस्वीरें और वीडियो बना रहे थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है.

सोशल मीडिया ने बढ़ाई मंदिर की चर्चा

खड़े हनुमान मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो और रील सामने आ रही हैं. कोई प्रतिमा के न हटने को भगवान का चमत्कार बता रहा है तो कोई इसे प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़कर देख रहा है. इन वीडियो के बाद ऐसे श्रद्धालु भी यहां पहुंच रहे हैं जो पहले इस मंदिर के बारे में नहीं जानते थे. प्रशासन को भी बढ़ती भीड़ को देखते हुए यहां बैरिकेडिंग करनी पड़ी है.

बोले श्रद्धालु- ‘भगवान को यहीं रहने दें’

गुरुवार को ‘आजतक’ ने मंदिर परिसर में मंदिर चौपाल लगाई और स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए श्रद्धालुओं से बातचीत की. अधिकांश श्रद्धालुओं की राय यही थी कि मंदिर को इसी स्थान पर रहने दिया जाना चाहिए. लोगों का कहना था कि शहर के विकास के लिए कई मंदिरों को पहले भी स्थानांतरित किया जा चुका है. बताया गया कि अब तक 60 से ज्यादा मंदिरों को अलग-अलग विकास कार्यों के चलते स्थानांतरित किया गया है. श्रद्धालुओं का कहना था कि अगर एक मंदिर को उसकी मौजूदा जगह पर छोड़ दिया जाए तो इससे शहर का विकास रुकने वाला नहीं है. उनका कहना था कि सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ की तैयारियां जरूरी हैं, लेकिन प्रशासन को जनभावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए. एक श्रद्धालु ने कहा कि यहां लाखों लोगों की श्रद्धा जुड़ी है. ऐसे में अगर भगवान के स्थान या स्वरूप को लेकर कोई बदलाव होता है तो लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं.

पुजारी बोले- ‘इतनी आसानी से हो सकता था काम’

मंदिर के पुजारी महेश बैरागी का कहना है कि पूरे मामले को जिस तरह आगे बढ़ाया गया, उससे स्थिति जटिल हुई है. उन्होंने बताया कि मंदिर को स्थानांतरित करने को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से सशर्त बातचीत भी हुई थी. उनका कहना है कि अगर पहले सभी पक्षों से सहमति बनाकर और धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखते हुए काम किया जाता तो विवाद की स्थिति पैदा नहीं होती. पुजारी के मुताबिक सोशल मीडिया पर मंदिर को लेकर चर्चा बढ़ने के बाद देशभर से श्रद्धालु आने लगे हैं. जो लोग महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं, उनमें से भी बड़ी संख्या अब खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए मंदिर आ रही है. उनका कहना है कि पिछले चार दिनों में भीड़ लगातार बढ़ी है.

अब IIT की स्कैनिंग से पता चलेगा सब कुछ

इस पूरे मामले में अब प्रशासन तकनीकी रास्ता भी तलाश रहा है. पुजारी महेश बैरागी के मुताबिक प्रशासन की ओर से आईआईटी के जरिए मंदिर और प्रतिमा की स्कैनिंग कराए जाने की तैयारी है. इसका मकसद यह पता लगाना है कि प्रतिमा और उसके आसपास की संरचना की वास्तविक स्थिति क्या है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए स्थानांतरित करने की कोई संभावना है या नहीं. दूसरी तरफ जिला प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर कई तरह की भ्रामक बातें चल रही हैं. प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि अब तक प्रतिमा को हटाने के लिए किसी मशीन या बल का इस्तेमाल नहीं किया गया है.

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