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मंदसौर: जमीन में गड़े थे ब्रिटिश काल के जार्ज पंचम की फोटो वाले 700 सिक्के, बंटवारे में लड़े लोग तो पुलिस को लगी भनक

मध्यप्रदेश के मंदसौर में एक मकान की नींव की खुदाई के दौरान 100 साल से ज्यादा पुराने 700 से अधिक चांदी के सिक्के मिले। साल 1904 के इन सिक्कों पर किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी है। खजाने को प्रशासन को सौंपने के बजाय आपस में बांटने और विवाद होने पर मामला पुलिस तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

मंदसौर जिले के भानपुरा थाना क्षेत्र स्थित बरखेड़ी गांव में मकान की नींव की खुदाई के दौरान 100 साल पुराने चांदी के सिक्के मिलने से इलाके में सनसनी फैल
गई है।

मंदसौर: मकान निर्माण के लिए हो रही खुदाई के दौरान मंदसौर के बरखेड़ी गांव में जमीन के भीतर से ऐसा खजाना निकला, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। इन सिक्कों पर किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी है। सभी सिक्के 1904 के आसपास के हैं। अगर आज के समय के हिसाब से अंदाजा लगाया जाए तो एक सिक्के की कीमत कम से कम 4000 रुपए होगी। अंग्रेजों के जमाने के इन सिक्कों के मिलने और फिर इन्हें आपस में बांटने में हुए झगड़े के बाद यह मामला फिलहाल पुलिस तक पहुंच गया है। पुलिस ने भी रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मकान की नींव खोदते वक्त बाहर आए चमकते सिक्के

यह पूरी घटना मंदसौर जिले के भानपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बरखेड़ी गांव की है। यहां 26 अगस्त की दोपहर करीब एक बजे एक मकान के निर्माण के लिए नींव की खुदाई का काम चल रहा था। मजदूर पूरी मेहनत से जमीन खोद रहे थे, तभी फावड़े के नीचे कुछ सख्त और भारी चीज टकराई। जब मिट्टी हटाकर देखा गया, तो वहां से एक या दो नहीं बल्कि 700 से ज्यादा पुराने चांदी के सिक्के बाहर निकले। इन सिक्कों पर साल 1904 दर्ज है और उन पर अंग्रेजी शासनकाल के किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर बनी हुई है, जिसे देखकर मजदूरों और मकान मालिक की आंखें फटी की फटी रह गईं।

खजाने के लालच में हो गया झगड़ा

नियमों के मुताबिक जमीन के नीचे से निकलने वाले किसी भी प्राचीन खजाने या पुरातात्विक महत्व की वस्तु की सूचना तुरंत प्रशासन को दी जानी चाहिए। लेकिन यहां लालच हावी हो गया। आरोप है कि खजाना मिलने के बाद इसे ईमानदारी से पुलिस या प्रशासन को सौंपने के बजाय मौके पर मौजूद लोगों ने आपस में बांट लिया। इस पूरे मामले को दबाने की पूरी कोशिश की गई ताकि किसी को कानो-कान खबर न हो।

विवाद बढ़ा तो खुली पोल, पुलिस ने कसा शिकंजा

गुप्त रूप से बांटे गए इन सिक्कों की संख्या और हिस्सेदारी को लेकर जल्द हीस अपनों के बीच ही विवाद खड़ा हो गया। बात बढ़ती-बढ़ती गांव के चौकीदार तक पहुंच गई और उसने तुरंत भानपुरा पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस एक्शन मोड में आ गई और ताबड़तोड़ दबिश देना शुरू कर दिया।

खुदाई के दौरान प्राचीन सिक्के मिलने की सूचना पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया है। आरोपियों के पास से सिक्के और नकदी बरामद कर ली गई है, और यह पता लगाया जा रहा है कि कुल कितने सिक्के निकले थे। रामस्नेही मिश्रा, एएसपी, मंदसौर

अब तक 144 सिक्कों की हुई रिकवरी

भानपुरा पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मकान मालिक प्रेमसिंह पिता देवीसिंह भाटी, मजदूर जीतमल बैरागी और दो नाबालिगों के खिलाफ आधिकारिक रूप से प्रकरण दर्ज कर लिया है। पूछताछ और तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अब तक 144 चांदी के सिक्के और 2 लाख 38 हजार रुपए नकद बरामद कर लिए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तत्कालीन समय की चांदी की शुद्धता और मौजूदा बाजार कीमत के आधार पर एक प्राचीन सिक्के की वैल्यू करीब 4 हजार रुपए तक आंकी जा रही है।

मकान निर्माण के दौरान नींव की खुदाई में मिले 700 से अधिक प्राचीन चांदी के सिक्के।
सिक्कों पर साल 1904 और अंग्रेजी शासनकाल के किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर है दर्ज।
प्रशासन को सूचना देने के बजाय सिक्कों को आपस में बांटने का चला खेल।
विवाद बढ़ने और चौकीदार की सूचना पर हरकत में आई भानपुरा थाना पुलिस।
मकान मालिक, मजदूर और दो नाबालिगों समेत कुल चार आरोपियों पर दर्ज हुआ प्रकरण।

इस इलाके में क्यों निकलता है खजाना?

ऐतिहासिक रूप से समृद्ध मालवांचल के कई इलाकों में पुराने समय से ही घरों या जमीन के नीचे धन दबाकर रखने की पुरानी परंपरा रही है। जब भी इस बेल्ट में पुराने कच्चे मकानों को गिराकर पक्के निर्माण या गहरी नींव की खुदाई की जाती है, ऐसे प्राचीन अवशेष या खजाने सामने आने की घटनाएं अक्सर चर्चा का विषय बन जाती हैं।

हालांकि, कानून के जानकारों का कहना है कि भारतीय खजाना अधिनियम के तहत जमीन से मिलने वाली ऐसी वस्तुएं सरकार की संपत्ति होती हैं। इस मामले में पुलिस अब यह गहराई से खंगाल रही है कि कुल कितने सिक्के निकले थे, बाकी के सिक्के फिलहाल कहां छुपाए गए हैं और इस बंटवारे में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

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