महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों उम्मीदवार सोमवार को पुणे की सड़कों पर उतरे। उन्होंने परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, बार-बार पेपर लीक होने और राज्य की भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के विरोध में एक बड़ा ‘आक्रोश मोर्चा’ निकाला।
पुणे : महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने सोमवार को पुणे में विरोध मार्च निकाला। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ विभिन्न परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक तथा अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि इन पदों पर तत्काल बेदाग छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। मार्च ओंकारेश्वर मंदिर चौक से शुरू होकर पुणे जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा। वहां प्रदर्शनकारियों ने एमपीएससी के कामकाज और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी विभिन्न मांगें उठाईं। छात्रों ने इसे आक्रोश मार्च नाम दिया।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार, बारामती सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम भी प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए और उनकी मांगों का समर्थन किया। पवार ने कहा कि सरकार को प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगें पूरी करनी चाहिए। सुप्रिया सुले ने भी छात्रों का समर्थन किया।
छात्रों के प्रदर्शन में पहुंचे रोहित पवार
ओमकारेश्वर मंदिर से शुरू होकर जिला कलेक्ट्रेट पर खत्म हुए इस मार्च में छात्रों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। साथ ही नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), इंडियन नेशनल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जैसी विपक्षी पार्टियों ने भी इसे समर्थन दिया। राज्य प्रशासन और आयोग के विरोध में काले रंग की शर्ट पहने विधायक रोहित पवार ने उम्मीदवारों की भारी भीड़ को संबोधित किया और एमपीएससी नेतृत्व पर कड़ा हमला बोला।
मैं महाराष्ट्र सरकार से ईमानदारी से अनुरोध करती हूं कि वे किसी ज़िम्मेदार व्यक्ति को भेजें और छात्रों से बातचीत करें। सुप्रिया सुले
रोहित पवार ने उठाए सवाल
एमपीएससी एक्साइज (विभागीय) परीक्षा से जुड़ी हालिया बातों का जिक्र करते हुए रोहित पवार ने प्रशासनिक गड़बड़ियों में सीधे तौर पर संस्था की मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने उन रिपोर्टों की ओर इशारा किया जिनमें एक उच्चस्तरीय संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी पर परीक्षा के मार्किंग पैटर्न को लीक करने का आरोप है। उन्होंने कहा कि यह बहुत चौंकाने वाली बात है कि जहां छात्र कड़ी तैयारी के लिए दिन में 20 घंटे देते हैं, वहीं आयोग के अधिकारी कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी सामग्री बेच रहे हैं। मेहनती उम्मीदवारों के साथ यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मार्च राजनीतिक नहीं है, यह हमारे युवाओं के भविष्य की लड़ाई है।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आयोग औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) परीक्षा को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर आठ दिनों के भीतर स्पष्टीकरण दे और कथित अनियमितताओं की जांच शुरू करे। अन्य मांगों में 2025 राज्य सेवा मुख्य परीक्षा और कृषि सेवा परीक्षा के वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग भी शामिल थी। उन्होंने यह भी मांग की कि मुंबई अपराध शाखा द्वारा एमपीएससी को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
सभी परीक्षाओं की फॉरेंसिंक ऑडिट की मांग
मुंबई अपराध शाखा मार्च में आयोजित एमपीएससी औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) स्क्रीनिंग परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले की जांच कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार किए गए एमपीएससी के अवर सचिव अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल के दौरान आयोजित सभी परीक्षाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की। उन्होंने लेंडवे और मामले में आरोपी एमपीएससी के दो अन्य सहायक अनुभाग अधिकारियों विश्वेश्वर दत्तात्रेय नकटे और गोपाल भट्टू मराठे के सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति के मानदंडों की विस्तृत जांच की भी मांग की।
अभ्यर्थियों ने 25 अक्टूबर 2026 को होने वाली ग्रुप-सी (क्लर्क और टाइपिस्ट के लिए) प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आयोजित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने स्टेनोग्राफर पद को फिर से बहाल करने की भी मांग की।
रोहित पवार बोले- राजनीतिक आंदोलन नहीं
रोहित पवार ने कहा कि राज्य सरकार को छात्रों की मांगें पूरी करनी चाहिए। यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं है। यह सभी एमपीएससी अभ्यर्थियों के नेतृत्व में चलाया जा रहा आंदोलन है। अपने इस्तीफे की मांग के बीच एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने पिछले सप्ताह कहा था कि औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना उनके आयोग का अध्यक्ष पद संभालने से पहले हुई थी।
मुंबई पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें परीक्षा में सातवां स्थान हासिल करने वाली एक महिला अभ्यर्थी भी शामिल है। भीमनवार के मुताबिक, आयोग ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निवारक और सुरक्षा उपायों की सिफारिश करने हेतु एक उच्चस्तरीय आंतरिक समिति का भी गठन किया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने भी परीक्षा प्रक्रिया में जरूरी सुधारों का सुझाव देने के लिए अलग से एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
रोहित पवार ने कहा कि क्या निष्पक्ष मौकों की मांग करने वाले छात्रों की मांगें राजनीतिक हैं। ये उम्मीदवार अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी मर्जी से इकट्ठा हुए हैं। भ्रष्टाचार के जरिए पद पाने के लिए 50 से 60 लाख रुपए देने वालों को न तो ये छात्र और न ही महाराष्ट्र राज्य स्वीकार करेगा। भारी भीड़ महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के बीच बढ़ते असंतोष को दिखाती है। छात्र संगठनों ने कहा है कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
कांग्रेस का भी समर्थन
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि पेपर लीक होने के कारण लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य बर्बाद हो गया है। उन्होंने कहा कि एमपीएससी चेयरमैन के इस्तीफे के बाद, कांग्रेस छात्रों की जायज मांगों के लिए पुणे में हो रहे इस बड़े विरोध मार्च का पूरी तरह समर्थन करती है। एमपीएससी जैसी स्वायत्त और संवेदनशील संस्था का कामकाज पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना बहुत जरूरी है। कांग्रेस इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं करेगी, क्योंकि यह छात्रों के भविष्य से जुड़ी है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का साफ रुख है कि परीक्षा पारदर्शी होनी चाहिए, भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए और छात्रों की कड़ी मेहनत को न्याय मिलना चाहिए। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए कांग्रेस छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होगी और इस संघर्ष में शामिल होगी। छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, न्याय के लिए उनकी लड़ाई अब और तेज होगी।
विजय वडेट्टीवार भी भड़के
इसके अलावा कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि एमपीएससी के अध्यक्ष और सचिव पेपर लीक और बड़े घोटाले के लिए जिम्मेदार हैं। यह घोटाला सरकार के सीधे संरक्षण के बिना नहीं हो सकता था। पेपर लीक सरकार द्वारा प्रायोजित था। अगर यह सिस्टम ईमानदारी से काम करता, तो पेपर लीक कभी नहीं होता। उन्होंने मीडिया से कहा कि महायुति सरकार ने ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करके उनके भरोसे को तोड़ा है! हम इस अन्याय को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि हम एमपीएससी के भ्रष्ट कामकाज और सरकार के खिलाफ छात्रों के आंदोलन का पूरा समर्थन करते हैं। छात्रों के अधिकारों के लिए और जब तक इन भ्रष्ट अधिकारियों को हटाया नहीं जाता, हम चुप नहीं बैठेंगे। हम पूरी ताकत के साथ इस छात्र आंदोलन में भाग लेंगे।

