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छिंदवाड़ा: साड़ी की डोली में 6 घंटे मरीज को लेकर चले ग्रामीण, तीन उफनती नदियां पार कर किया 13 किलोमीटर का सफर

छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव स्थित ग्राम पील्हावाड़ी में सड़क न होने के कारण एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली सामने आई है। पेट दर्द से पीड़ित 22 वर्षीय महिला को परिजनों ने लाठी और साड़ी से बनी डोली में बैठाकर तीन उफनती नदियों और जंगलों को पार करते हुए छह घंटे का सफर तय कर अस्पताल पहुंचाया।

तीन उफनती नदियां और जंगल पार कर साड़ी की डोली में 6 घंटे तक मरीज को ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण

छिंदवाड़ा: जिले से एक बार फिर ग्रामीण इलाकों की बदहाल तस्वीर सामने आई है। जुन्नारदेव के ग्राम पील्हावाड़ी में सड़क और आवागमन की सुविधा न होने के कारण एक 22 वर्षीय महिला और उसके परिजनों को भारी संघर्ष करना पड़ा। गांव की रहने वाली कड्डे पति राजू ढीकू के पेट में अचानक तेज दर्द उठा, जिसके बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। गांव तक एंबुलेंस या कोई अन्य चारपहिया वाहन पहुंचने का रास्ता न होने के कारण परिजनों को मजबूरी में लाठी और साड़ी की मदद से एक अस्थायी डोली तैयार करनी पड़ी और महिला को उसमें बैठाकर पैदल ही अस्पताल के लिए निकलना पड़ा।

उफनती नदियां और पहाड़ी पगडंडियों से गुजरा सफर

परिजनों को इस कठिन सफर के दौरान उफनती नदियों, पहाड़ी रास्तों और जंगल की पथरीली पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ा। मन्नू ढीकू और अन्य ग्रामीणों ने मिलकर कड्डे को डोली में बैठाया और झालमऊ की ओर रवाना हुए। रास्ते में डोबरी डोह और दानी घाट नदी को किसी तरह पार किया गया, लेकिन आगे चलकर झालमऊ के पास रिंदों नदी में पानी का बहाव बहुत अधिक होने के कारण मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद मिला। इसके बाद हार न मानते हुए परिजनों ने पहाड़ के किनारे बनी पथरीली जंगल की पगडंडी का सहारा लिया और लंबा चक्कर काटकर ग्राम कट्टा (बिचबेहरी) पहुंचे, जहां से वाहन की व्यवस्था हो सकी।

पील्हावाड़ी गांव में सड़क और आवागमन का अभाव बारिश के मौसम में बड़ी मुसीबत बन जाता है।
डोबरी डोह, दानी घाट और रिंदों नदी को पार करते हुए परिजनों ने जान जोखिम में डाली।
करीब 13 किलोमीटर का दुर्गम सफर तय कर महिला को दमुआ के निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया।
गांव से अस्पताल तक पहुंचने में परिवार को कुल छह घंटे से अधिक का समय लगा।

बारिश आते ही पूरी तरह कट जाता है गांव का संपर्क

ग्रामीणों का कहना है कि पील्हावाड़ी गांव में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। बारिश का मौसम शुरू होते ही गांव का संपर्क मुख्य मार्गों से लगभग पूरी तरह कट जाता है। हालात यह हो जाते हैं कि दोपहिया वाहन यानी बाइक से भी गांव तक पहुंचना असंभव हो जाता है। ऐसे में यदि किसी गर्भवती महिला, बुजुर्ग या किसी अन्य गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़े, तो ग्रामीणों के पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता कि वे उसे डोली में लादकर कई किलोमीटर पैदल सफर तय करें।

प्रशासनिक दावों पर खड़े होते सवाल

यह घटना केवल एक परिवार की निजी परेशानी नहीं है, बल्कि यह देश और राज्य के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य और सड़क बुनियादी ढांचे की पोल खोलती है। जिस समय मरीज को जीवन बचाने के लिए हर एक मिनट कीमती होता है, उस समय ग्रामीणों को इस तरह का संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि अगर इस इलाके में जल्द सड़क का निर्माण हो जाए और आवागमन सुगम हो जाए, तो भविष्य में किसी भी मरीज को इस प्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर सफर नहीं करना पड़ेगा। फिलहाल महिला का इलाज दमुआ में जारी है और उसकी स्थिति में सुधार है।

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