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अब पानी और इलाज लेने से भी इनकार, 12 को मुंबई कूच का ऐलान, जालना में मनोज जरांगे पाटील का आंदोलन और तेज हुआ

मराठा आरक्षण के लिए मनोज जरांगे का आंदोलन रविवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार उन्हें दिए गए आश्वासनों को पूरा करने में विफल रही है, और इसके विरोध में उन्होंने पानी या चिकित्सा उपचार लेने से इनकार करते हुए आंदोलन को और तेज कर दिया।

जालना : मराठा आरक्षण आंदोलन एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। कोटा की मांग कर रहे कार्यकर्ता मनोज जारांगे ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के आठवें दिन पानी और सलाइन लेना बंद कर दिया और मेडिकल इलाज कराने से भी इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी सभी मांगों को लागू किए जाने के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। इस घटनाक्रम ने सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत को एक तरह से फिर से शुरू कर दिया है। कुछ दिन पहले ही जारांगे ने मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल के इस आश्वासन पर पानी और सलाइन लेने पर सहमति जताई थी कि कुछ मुख्य मांगों पर दो दिनों के भीतर कार्रवाई की जाएगी।

बिना किसी ठोस फैसले के वह समय-सीमा बीत जाने के बाद, जारांगे ने अपना रुख कड़ा कर लिया और अपनी जांच करने आई मेडिकल टीम को वापस लौटा दिया। मनोज जारांगे ने कहा कि जब तक सरकार वास्तव में हमारी सभी मांगों को लागू नहीं करती, तब तक मैं कुछ भी नहीं लूंगा और न ही इलाज कराऊंगा।

जहां से शुरू हुआ था मनोज जरांगे आंदोलन, फिर वहीं पहुंचा

मनोज जरांगे के पानी, सलाइन और इलाज लेने से इनकार करने और उनके मुंबई मार्च की समय-सीमा पास आने के कारण, यह गतिरोध एक बार फिर वहीं पहुंच गया है जहां से शुरू हुआ था। इससे पहले हफ्ते की शुरुआत में, जरांगे राज्य सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल की अपील के बाद पानी पीने और नसों के जरिए तर‍ल लेने के लिए सहमत हो गए थे, लेकिन अब उन्होंने अपनी सहमति वापस ले ली है। उन्होंने यहां अंतरवाली सराटी में विरोध स्थल पर डॉक्टरों से चिकित्सा जांच कराने से इनकार कर दिया और कहा कि जब तक उनकी मांगें असल में पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वह कोई इलाज नहीं कराएंगे।

जब तक सरकार हमारी सभी मांगों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं करती, तब तक मैं कुछ भी नहीं लूंगा और न ही कोई इलाज कराऊंगा। सरकार की ओर से आरक्षण के मुद्दे से जुड़ी जानकारी गांवों तक सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से पहुंचाने का आश्वासन भी अब तक लागू नहीं किया गया है।
मनोज जरांगे

12 सितंबर को मुंबई कूच तय

जरांगे ने हालांकि कहा है कि मांगें पूरी होने तक वह अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह 12 सितंबर को मुंबई जाने के अपने फैसले पर कायम रहेंगे। जरांगे ने मांग की है कि 12 सितंबर तक पात्र मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर सरकार शासनादेश (जीआर) जारी करे। इससे समुदाय के सदस्यों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

मनोज जरांगे की मांगें

सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने संकेत दिया है कि मांगों पर अंतिम फैसला अगले एक या दो दिनों में बताया जा सकता है। हालांकि, जारांगे ने साफ कर दिया है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे 12 सितंबर को मुंबई तक मार्च करने के अपने फैसले पर अडिग रहेंगे। इस आंदोलन की मुख्य मांग है कि जस्टिस शिंदे समिति द्वारा पहचाने गए 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर तुरंत कुनबी सर्टिफिकेट जारी किए जाएं और मराठवाड़ा में योग्य मराठों को कुनबी दर्जा देने के लिए हैदराबाद गजेटियर के प्रावधानों को लागू किया जाए।

मनोज जरांगे की मांगे ये भी

मनोज जारांगे पाटील ने सतारा और कोल्हापुर रियासतों और औंध-पुणे-बॉम्बे सरकार के गजेटियर में शामिल प्रावधानों को लागू करने के लिए सरकारी आदेश (GR) जारी करने और जाति वैधता प्रमाण पत्र की प्रक्रियाओं पर स्पष्टता की भी मांग की है। अन्य मुख्य मांगों में सगे-सोयरे (खून के रिश्तेदार) नोटिफिकेशन को तुरंत लागू करना, पूरे महाराष्ट्र में मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों (जिनमें अंतरवाली सराटी आंदोलन से जुड़े मामले भी शामिल हैं) को वापस लेना और एक अलग मराठा और कुनबी मंत्रालय बनाना शामिल है।

उन्होंने योग्य आवेदकों के लिए तुरंत कुनबी सर्टिफिकेट और जिन्हें पहले ही कुनबी दर्जा मिल चुका है, उनके लिए जाति वैधता प्रमाण पत्र की मांग की है। उन्होंने मराठा समुदाय को OBC सुविधाएं और रियायतें देने वाले सरकारी आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग की है। मनोज जरांगे यह भी चाहते हैं कि SARTHI की सभी लंबित योजनाएं लागू की जाएं, डॉ. पंजाबराव देशमुख स्कॉलरशिप के लिए फंड जारी किया जाए और हॉस्टल सुविधाओं का विस्तार किया जाए। उन्होंने आरक्षण आंदोलन के दौरान मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों के लिए नौकरी और आर्थिक मदद की भी मांग की है।

मनोज जरांगे की बाकी मांगों में कुनबी एंट्री के लिए ऐतिहासिक रिकॉर्ड की जस्टिस शिंदे कमेटी द्वारा जांच फिर से शुरू करना, EWS, SEBC और ESBC कैटेगरी के तहत चुने गए मराठा उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र देना, और अन्नासाहेब पाटिल इकोनॉमिक बैकवर्ड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के ज़रिए लिए गए वाहन लोन के लाभार्थियों को बकाया ब्याज का रिफंड देना शामिल है।

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