द्वारका जिले के जाम खंभालिया तालुका में सरकारी दावों और हकीकत में बहुत बड़ा अंतर सामने आया है। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के चारा बांटने को लेकर किए गए बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागजों पर ही साबित हुए हैं। पूरे खंभालिया तालुका में 6 हजार से ज्यादा पशु कार्ड बांटे जा चुके हैं, लेकिन बांटने के लिए सिर्फ एक सेंटर शुरू किया गया है, जिससे पशुपालकों को काफी परेशानी हो रही है।
आज सुबह से ही दांता गांव में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के घास गोदाम पर चारा लेने के लिए बड़ी संख्या में पशुपालक लाइनों में खड़े थे। प्रशासन ने पशुपालकों को एक तय समय पर बुलाया था कि “आज घास मिलेगी”। लेकिन घंटों लाइन में लगने के बाद पता चला कि गोदाम में घास ही नहीं है। घास की काफी मात्रा न होने के बावजूद पशुपालकों को दूर-दूर से चारा लाने के लिए धकेला जा रहा था, जिससे पशुपालकों में काफी गुस्सा और नाराजगी है। आखिरकार घंटों की मुश्किल के बाद पशुपालकों को बिना घास लिए ही अपने घरों को लौटने को मजबूर होना पड़ा।
सरकारी डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर पर मैनेजमेंट के नाम पर अव्यवस्था देखने को मिली है। चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी में लाइन में खड़े पशुपालकों के लिए सेंटर पर छाया या पीने के पानी का कोई बेसिक इंतज़ाम नहीं किया गया है। सुबह से भूखे-प्यासे लोगों के लिए सिस्टम की यह बेपरवाही सामने आई है। पशुपालकों ने गुस्से में मांग की है कि तुरंत पीने का पानी और छाया का इंतज़ाम किया जाए।
बिगड़ते हालात और पशुपालकों की भारी परेशानी के बीच, इंचार्ज ममलतदार व्यास तुरंत घास डिपो पहुंचे। उन्होंने पशुपालकों से घास डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के बारे में बात की और उनकी बातें सुनीं। पूरे तालुका में सिर्फ़ एक डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर होने से होने वाली भीड़ और अव्यवस्था के बारे में ममलतदार के सामने ज़ोरदार बात रखी गई। पशुपालकों की बढ़ती संख्या और चारे की भारी ज़रूरत को देखते हुए, जाम खंभालिया तालुका में तुरंत 2 से 3 और नए चारा बांटने वाले सेंटर शुरू करने की ज़ोरदार मांग उठ रही है। अगर समय रहते सेंटर नहीं बढ़ाए गए और काफ़ी चारा नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में पशुपालकों का विरोध और तेज़ होने की पूरी संभावना है।

