गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ. हिरेन बैंकर ने गुजरात में दलितों और आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर BJP सरकार की आलोचना की है। लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि BJP सरकार के राज्य में ‘विकास’ के खोखले दावों के बीच दलित और आदिवासी लगातार डर में जी रहे हैं।
हर दिन 3 दलितों और 1 आदिवासी पर अत्याचार
डॉ. हिरेन बैंकर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि BJP सरकार सिर्फ वोटों की राजनीति जानती है, लेकिन नागरिकों को संवैधानिक अधिकार और सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम रही है। राज्य में अनुसूचित जातियों (SC) पर अत्याचार की कुल 13,731 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे पता चलता है कि औसतन हर दिन 3 से ज़्यादा दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। ये आंकड़े सिर्फ दर्ज अपराधों के हैं, जबकि हजारों मामले डर और दबाव के कारण पुलिस तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने आदिवासी समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को लेकर सरकार की बेपरवाही की भी कड़ी आलोचना की। पिछले छह सालों में अनुसूचित जनजातियों (ST) पर अत्याचार के कुल 1,887 नए मामले दर्ज हुए हैं और अभी 3,553 मामलों में ट्रायल चल रहा है। यह स्थिति दिखाती है कि राज्य में हर 48 घंटे में कोई आदिवासी भाई या बहन अत्याचार या हमले का शिकार होता है। अहमदाबाद, बनासकांठा, सुरेंद्रनगर, राजकोट, कच्छ और जूनागढ़ जैसे जिलों में अनुसूचित जातियों पर अपराध खतरनाक दर से बढ़ रहे हैं।
अपराधियों को सज़ा देने में सरकार पूरी तरह बेकार: सज़ा की दर में गिरावट
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार अपराधियों को सज़ा देने में नाकाम रही है। 2023 में अनुसूचित जाति के मामलों में सज़ा की दर 7.4 प्रतिशत थी, जो 2024 में घटकर सिर्फ़ 5.4 प्रतिशत रह गई है। इसी तरह, अनुसूचित जनजाति के मामलों में सज़ा की दर 2023 में 11.7 प्रतिशत से घटकर 2024 में सिर्फ़ 4.5 प्रतिशत रह गई है।
पिछले 6 सालों में दर्ज मामलों की स्थिति
अनुसूचित जाति (SC):
साल 2019: 1416 मामले
साल 2020: 1326 मामले
साल 2021: 1201 मामले
साल 2022: 1279 मामले
साल 2023: 1373 मामले
साल 2024: 1304 मामले
पिछले छह सालों की कुल संख्या: 7899 मामले
अनुसूचित जनजाति (ST):
साल 2019: 321 मामले
साल 2020: 291 केस
साल 2021: 341 केस
साल 2022: 330 केस
साल 2023: 307 केस
साल 2024: 297 केस
पिछले छह सालों की कुल संख्या: 1887 केस
जन जागरूकता के नाम पर मिंडू और कांग्रेस की मांग
उन्होंने जन जागरूकता के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। SC-ST अधिकारों के लिए देश भर में 15,000 से ज़्यादा जन जागरूकता प्रोग्राम हो चुके हैं, जबकि गुजरात सरकार ने 2018 और 2019 में सिर्फ़ 6-6 प्रोग्राम किए, जबकि 2020 में एक भी प्रोग्राम नहीं हुआ। कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि पेंडिंग केस में तुरंत सख़्त कार्रवाई की जाए, केस फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाए जाएं और दलित और आदिवासी समुदायों की सुरक्षा पक्की की जाए।

