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बलिया में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत से हड़कंप, पत्नी और मां के बाद बेटी की भी गई जान

बलिया के पशुहारी गांव में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। बताया जा रहा कि 29 अगस्त को पहले पत्नी की मौत, एक सितंबर को मां की मौत और अंतिम संस्कार से घर लौटने पर बेटी की मौत हो गई।

बलिया में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत

उत्तरप्रदेश के बलिया जिले के बिल्थरारोड तहसील अंतर्गत पशुहारी गांव में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से न सिर्फ घर और परिवार के लोग बल्कि पूरा गांव मायूस है। जहां परिवार में खुशी का माहौल बना हुआ था, वहां दुखों का पहाड़ सा टूट पड़ा। बताया जा रहा है कि बेटी की शादी तय होने के बाद घर में तैयारियां शुरू होने वाली थीं। लेकिन परिवार में अचानक तीन मौतें ने सभी को झकझोर कर रख दिया।

पत्नी और मां के बाद बेटी की मौत

बताया जा रहा है कि शनिवार यानी 29 अगस्त को पत्नी की मौत, मंगलवार 1 सितम्बर को मां की मौत और अंतिम संस्कार से वापस लौटने पर एक तारीख को ही बेटी की भी मौत हो गई। हालांकि सूचना मिलते ही जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। घटना के बाद जांच टीम गांव में पहुंची।

‘स्वाइन फ्लू के कोई सिम्टम्स नहीं’

गुरुवार को नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से सीएमओ अभय नारायण राय ने बताया कि स्वाइन फ्लू का कोई भी सिम्टम्स जांच में नहीं मिला है। स्वास्थ्य विभाग की नजर बनी हुई है, जिन्हें बुखार है उन्हें जिला अस्पताल लाया जा रहा है,ताकि बुखार होने का कारण पता चल सके।

एक के बाद एक तीन मौतें

पशुहारी गांव में 1 सितम्बर को परिवार के लोग मां का अंतिम संस्कार कर घर लौटे ही थे कि वाराणसी के ट्रामा सेंटर से 24 वर्षीय बेटी प्रीति की मौत की सूचना आ गई। एक के बाद एक तीन मौतों से शिवचंद राजभर का परिवार टूट गया। जानकारी के मुताबिक पशुहारी गांव निवासी शिवचंद राजभर अपनी पत्नी आशा देवी (45), मां जोनिया (80), बेटे मनन एवं बेटी प्रीति (24 ) के साथ रहते थे।

परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं

शिवचंद कर्नाटक में रहकर लोहा वेल्डिंग का काम करते थे। करीब एक माह पहले वह बेटे मनन के साथ गांव लौटे थे। इसी दौरान बेटी प्रीति की शादी तय हुई थी। घर में शादी को लेकर खुशियों का माहौल था, परिवार तैयारियों में जुटने वाला था।

29 अगस्त को पत्नी की मौत से टूटा पहला पहाड़

परिजनों के अनुसार आशा देवी पहले से बीमार रहती थीं। उन्हें दिमागी बीमारी और पाइल्स की शिकायत थी। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्थानीय स्तर पर ही उनका इलाज कराया जा रहा था। इसी बीच उन्हें सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। इलाज के दौरान शनिवार को उनकी मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि मंगलवार को शिवचंद की बुजुर्ग मां जोनिहा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। कुछ ही देर बाद उनकी भी मौत हो गई। परिवार के लोग गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार करने चले गए।

अंतिम संस्कार से लौटने पर मिली बेटी की मौत की खबर

इधर प्रीति की हालत भी लगातार गंभीर होती जा रही थी। परिजनों के अनुसार उसे सर्दी-जुकाम और कमर दर्द के साथ खून की कमी थी। उसका प्लेटलेट्स भी काफी कम हो गया था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे वाराणसी स्थित ट्रामा सेंटर ले गए थे। वहां उसका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान परिजनों ने कई यूनिट रक्त भी उपलब्ध कराया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। मंगलवार को जोनिहा का अंतिम संस्कार करने के बाद परिवार के लोग घर लौटे ही थे कि वाराणसी से प्रीति की मौत की सूचना आ गई। कुछ घंटे के अंतराल में मां और बेटी दोनों को खोने की खबर से परिवार में चीख-पुकार मच गई।

एसडीएम ने भेजी चिकित्सकों की टीम

एक ही परिवार में तीन दिनों के भीतर तीन मौतों की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन भी अलर्ट मोड में आया। एसडीएम के निर्देश पर चिकित्सकों की एक टीम को शिवचंद के घर जांच के लिए भेजा गया। टीम ने परिवार की स्वास्थ्य स्थिति, मौतों से जुड़े कारणों की जानकारी ली।

तीन मौतों में स्वाइन फ्लू का कोई सिम्टम्स नहीं

सीएमओ अभय नारायण राय ने बताया कि प्राथमिक जांच में पत्नी आशा देवी एवं बेटी प्रीति की मौत खून की कमी के चलते हुई है, जबकि बुजुर्ग मां जोनिहा की मौत सांस लेने में तकलीफ के कारण हुई। उन्होंने बताया कि फिलहाल चिकित्सकों की टीम यह भी जांच कर रही है कि कहीं परिवार में डेंगू या किसी अन्य बीमारी का संक्रमण तो नहीं था। इतना ही नहीं सीएमओ ने कहा कि अभी भी जांच टीम लगी हुई है।

शादी की खुशियों की जगह पसरा मातम

ग्रामीणों के मुताबिक आर्थिक परेशानियों के बावजूद शिवचंद अपने बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे थे। वह कर्नाटक में मेहनत कर परिवार का खर्च चलाते थे। बेटे मनन को भी अपने साथ ले गए थे, ताकि वह दोपहिया वाहनों की मरम्मत का काम सीखकर आत्मनिर्भर बन सके। करीब एक माह पहले गांव लौटने के बाद बेटी की शादी तय हुई तो परिवार में खुशियां लौट आई थीं, अब शादी की खुशियों की जगह मातम पसरा है।

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